MP Talented Students Scheme: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार को आयोजित ‘प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना’ का कार्यक्रम सिर्फ लैपटॉप राशि बांटने तक सीमित नहीं रहा। मंच पर पहुंचे कुछ ऐसे मेधावी विद्यार्थियों ने अपनी उपलब्धियां बताईं, जिन्होंने 12वीं की पढ़ाई के साथ NEET और JEE Main जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं भी पास की हैं। छात्रों की मेहनत और उनके बड़े सपनों से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खासे प्रभावित नजर आए। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 1.21 लाख से अधिक विद्यार्थियों के खातों में 304 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि ट्रांसफर की। पात्र विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रुपये दिए गए।
भोपाल में मेधावी छात्रों के लिए खास रहा कार्यक्रम
कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मेधावी विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने मंच पर मौजूद छात्रों से उनकी पढ़ाई, रुचि और भविष्य के लक्ष्य के बारे में सवाल किए। इसी बातचीत के दौरान कई विद्यार्थियों ने ऐसी उपलब्धियां साझा कीं, जिन्हें सुनकर मुख्यमंत्री ने उनकी सराहना की। किसी छात्र ने NEET पास करने की बात बताई तो किसी ने 12वीं के साथ NEET और JEE Main दोनों परीक्षाएं सफलतापूर्वक पूरी कीं। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों की मेहनत की तारीफ करते हुए कहा कि छोटी उम्र में उनके सपने और प्रयास दोनों बड़े हैं।
1.21 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों के खातों में पहुंची राशि
‘प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना’ के तहत 12वीं कक्षा में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल करने वाले पात्र विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए आर्थिक सहायता दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रिमोट का बटन दबाकर 1 लाख 21 हजार से अधिक विद्यार्थियों के बैंक खातों में 304 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि ट्रांसफर की। इस दौरान कार्यक्रम में 10 विद्यार्थियों को मंच पर लैपटॉप भी प्रदान किए गए। खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने बच्चों के साथ रिमोट का बटन दबाकर राशि ट्रांसफर करने की प्रक्रिया पूरी की।
12वीं के साथ NEET और JEE Main पास करने वाले छात्र ने चौंकाया
कार्यक्रम में विद्यार्थियों से संवाद के दौरान ओम चौकसे ने अपनी उपलब्धि बताई तो मुख्यमंत्री भी प्रभावित हुए। ओम ने बताया कि उसने 12वीं की पढ़ाई के साथ NEET, JEE Main और CUET भी क्लियर किया है। उसका लक्ष्य डॉक्टर बनना है। मुख्यमंत्री ने उसकी उपलब्धि पर उत्साह जताते हुए कहा कि उम्र छोटी है, लेकिन उपलब्धि और लक्ष्य काफी बड़े हैं। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि ओम के पिता बैग बनाने का काम करते हैं और उनके पास अपनी दुकान तक नहीं है। यह उदाहरण कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए मेहनत और सीमित संसाधनों के बावजूद आगे बढ़ने की प्रेरणा बना।
पहली कोशिश में NEET क्लियर कर मेडिकल कॉलेज पहुंची तन्वी
कार्यक्रम में तन्वी की उपलब्धि भी चर्चा का विषय रही। मुख्यमंत्री ने बताया कि तन्वी ने 12वीं की पढ़ाई के साथ मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET भी सफलतापूर्वक पास की और पहली कोशिश में ही कामयाबी हासिल की। तन्वी ने मुख्यमंत्री के सामने डॉक्टर बनने की इच्छा जताई। वहीं अरिमा इमरान ने भी बताया कि वह NEET की तैयारी कर डॉक्टर बनना चाहती हैं। उन्होंने भविष्य में जरूरतमंद लोगों की सेवा करने की इच्छा जाहिर की।
किसी ने IAS तो किसी ने ISRO वैज्ञानिक बनने का सपना बताया
कार्यक्रम में छात्रों ने अपने अलग-अलग करियर लक्ष्य भी मुख्यमंत्री के साथ साझा किए। याशी ने बताया कि वह भविष्य में IAS अधिकारी बनना चाहती हैं। वहीं अभिषेक ने ISRO में वैज्ञानिक बनने का लक्ष्य बताया। छात्रा हिमांशी पाठक ने कहा कि वह शुरुआत में एयर होस्टेस बनना चाहती हैं, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य उद्यमी बनना है। उन्होंने प्रतियोगिता के दौर में नौकरी लेने के बजाय खुद का काम खड़ा करने की इच्छा जताई। मुख्यमंत्री ने उनकी बात को सरल शब्दों में समझाते हुए कहा कि लक्ष्य ऐसा होना चाहिए कि व्यक्ति नौकरी पाने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बने।
‘मैं राजनेता बनना चाहता हूं’ छात्र के जवाब ने खींचा ध्यान
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से पूछा कि वे बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं। इस दौरान वीरेंद्र सिंह बुंदेला ने कहा कि वह राजनेता बनना चाहते हैं। वीरेंद्र ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि उन्होंने लोगों की परेशानियां देखी हैं और वह राजनीति के जरिए उन समस्याओं को दूर करना चाहते हैं। उन्होंने देश के विकास में योगदान देने की इच्छा जताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छे और संवेदनशील लोगों का राजनीति में आना भी जरूरी है, क्योंकि जनप्रतिनिधि देश और समाज को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
खेती को लेकर CM ने बच्चों से पूछा सवाल
मुख्यमंत्री ने छात्रों से यह भी पूछा कि कितने बच्चों के परिवार खेती-किसानी से जुड़े हैं और कौन भविष्य में किसान बनना चाहता है। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश की जड़ खेती-किसानी से जुड़ी है। डॉक्टर, इंजीनियर और वकील बनने की इच्छा रखने वाले बच्चों के बीच किसान बनने की इच्छा कम सुनाई देती है, जबकि अन्न उत्पादन के बिना समाज की व्यवस्था आगे नहीं बढ़ सकती। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने मूल और समाज की जरूरतों को समझने का संदेश दिया।
CM मोहन यादव ने कहा- सफलता सिर पर न चढ़े, असफलता दिल पर न लगे
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विद्यार्थियों को सफलता और असफलता दोनों को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मेहनत से मिली सफलता को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। वहीं यदि जीवन में कभी असफलता मिलती है तो उसे दिल पर भी नहीं लेना चाहिए। गलतियों से सीख लेकर आगे बढ़ते रहना ही सफलता की दिशा में सबसे जरूरी कदम है। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि अच्छे इंसान की पहचान सिर्फ परीक्षा में मिले अंकों से नहीं होती। व्यक्ति का चरित्र और उसके भीतर की सोच भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने ज्ञान और कौशल को सफलता के दो महत्वपूर्ण आधार बताया।
लैपटॉप योजना के तहत अब तक 6.5 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को लाभ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि राज्य सरकार की प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के तहत बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। सरकार के अनुसार अब तक करीब 6.5 लाख विद्यार्थियों को 1,620 करोड़ रुपये की राशि उनके खातों में भेजी जा चुकी है। पिछले वर्ष करीब 92 हजार विद्यार्थियों को योजना का लाभ मिला था, जबकि इस वर्ष स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के करीब 1.22 लाख विद्यार्थी इससे लाभान्वित हुए हैं।
सरकारी स्कूलों के मेधावी छात्रों का बढ़ रहा प्रदर्शन
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश बोर्ड की परीक्षाओं की मेरिट सूची में 50 प्रतिशत से ज्यादा विद्यार्थी सरकारी स्कूलों से आते हैं। उन्होंने सरकारी स्कूलों में बेहतर परिणाम देने वाले शिक्षकों और अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा व्यवस्था में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से बच्चों को पाठ्य पुस्तकें, यूनिफॉर्म, साइकिल, लैपटॉप और स्कूटी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही।
दो साल में खुले 5 नए मेडिकल कॉलेज
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में आजादी के बाद शुरुआती 55 वर्षों में केवल 5 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि अब सरकारी और निजी संस्थानों को मिलाकर प्रदेश में 33 मेडिकल कॉलेज हैं। राज्य में वर्तमान में 6,500 से अधिक MBBS सीटें होने की बात भी कही गई। मुख्यमंत्री के अनुसार पिछले दो वर्षों में 5 नए मेडिकल कॉलेज शुरू किए गए हैं, जिससे UG स्तर पर करीब 2,400 सीटों की बढ़ोतरी हुई। सरकार ने वर्ष 2028 तक 55 मेडिकल कॉलेज और 10 हजार UG सीटों का लक्ष्य रखा है।
स्कूल शिक्षा मंत्री बोले- सरकारी स्कूलों में बढ़ रहा भरोसा
स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि राज्य में सरकारी स्कूलों को लेकर अभिभावकों और विद्यार्थियों का भरोसा बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई साल में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए राशि दी गई है। उनके मुताबिक सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और उनकी आगे की पढ़ाई को डिजिटल संसाधनों से आसान बनाना है। मंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में सरकारी स्कूलों में प्रवेश दर में लगातार सुधार हुआ है और सरकार शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की दिशा में भी काम कर रही है।