कांग्रेस के कद्दावर नेता शशि थरूर ने आज नए लोकसभा कक्ष में पीएम मोदी द्वारा स्थापित किए गए ऐतिहासिक राजदंड 'सेंगोल' को लेकर हुए भारी विवाद खड़ा कर दिया है। आपको बता दें कि, कांग्रेस के सीनियर नेता थरूर ने अपनी पार्टी के विपक्ष जाकर बयान दिया है। शशि थरूर की टिप्पणी उनकी पार्टी द्वारा राजदंड के इतिहास पर सरकार के दावों को फर्जी करार दिए जाने के बाद आई है।
सेंगोल को लेकर कांग्रेस के दावे के उलट शशि थरूर का ट्वीट
तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक ट्वीट करते हुए लिखा कि, सेंगोल विवाद पर मेरे नज़रिये से दोनों पक्षों के पास अच्छे तर्क हैं। सरकार का यह तर्क उचित है कि, राज-दंड पवित्र संप्रभुता और धर्म के शासन को मूर्त रूप देते हुए परंपरा का चलता रहना दिखाता है। जबकि, विपक्ष का यह तर्क उचित है कि, संविधान देशवासियों के नाम पर बना है और संप्रभुता देशवासियों की संसद में देशवासियों के प्रतिनिधित्व में मौजूद है और संविधान किसी राजा को राजसी विशेषाधिकार से मिलने वाला कोई दैवीय अधिकार नहीं है।इस प्रतीक को हमें सम्मान देना चाहिए - थरूर
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपने इस ट्वीट में आगे लिखा कि, सत्ता और विपक्ष के इन तर्कों में सामंजस्य बैठ सकता है यदि माउंटबेटन द्वारा नेहरू को राज-दंड सत्ता के हस्तांतरण के रूप में दिए जाने वाली विवादास्पद और ध्यान भटकाने वाली कहानी, जिसका कोई प्रमाण नहीं है, को हटा दिया जाए। हमें सीधा कहना चाहिए कि, राजदंड सेंगोल शक्ति और प्रभुत्व का पारंपरिक चिन्ह है, जिसे लोकसभा में स्थापित करते हुए, भारत यह निश्चित कर रहा है कि संप्रभुता वहां लोकसभा में रहती है, न कि किसी राजा के पास। वर्तमान के मूल्यों की पुष्टि के लिए बीते कल के इस प्रतीक को हमें सम्मान देना चाहिए।Read More: नई संसद के उद्घाटन के अवसर पर पीएम मोदी ने कहा - दुनिया भारत को उम्मीद से देख रही है
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