नई दिल्ली. भारतीय रेलवे देश के सबसे बड़े सार्वजनिक परिवहन तंत्रों में शामिल है और रोजाना करोड़ों यात्रियों की आवाजाही स्टेशनों तथा ट्रेनों के जरिए होती है। ऐसे में पेयजल, शौचालय और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि यात्रियों के स्वास्थ्य और सार्वजनिक सुरक्षा से सीधे जुड़ी हुई हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की जांच में यात्री सुविधाओं से संबंधित निर्धारित नियमों के पालन में कई स्तरों पर कमी सामने आने से रेलवे की व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं। कैग की विभिन्न रेलवे संबंधी रिपोर्टों में भी समय-समय पर पानी, स्वच्छता और यात्री सुविधाओं के क्रियान्वयन में कमियां दर्ज की गई हैं।
पेयजल में ई-कोली मिलने से बढ़ी चिंता
सबसे गंभीर मामला रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध पेयजल की गुणवत्ता से जुड़ा है। कैग के अनुसार छह जोन के 59 स्टेशनों पर पेयजल का जीवाणु संबंधी विश्लेषण नहीं किया गया। इसके अलावा कुछ स्टेशनों पर जल शीतलकों से लिए गए नमूनों में ई-कोली बैक्टीरिया के नमूने पाए गए। दक्षिण रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शन, दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद, मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावाला तथा पूर्वी रेलवे के मधुपुर स्टेशन से लिए गए नमूनों में यह समस्या सामने आने की बात रिपोर्ट में कही गई है। पेयजल में ऐसे जीवाणु की मौजूदगी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है और यह बताती है कि जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी में कहीं न कहीं खामी रही है।
512 स्टेशनों की यात्री सेवाओं की हुई जांच
कैग ने विभिन्न जोन के 512 रेलवे स्टेशनों पर यात्री सेवाओं की स्थिति का अध्ययन किया। इस तरह की व्यापक जांच का उद्देश्य केवल किसी एक स्टेशन की स्थिति देखना नहीं, बल्कि रेलवे द्वारा निर्धारित यात्री सुविधा मानकों के वास्तविक क्रियान्वयन का आकलन करना था। रिपोर्ट में सामने आई कमियां इस ओर संकेत करती हैं कि नियम और दिशानिर्देश तैयार कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके पालन की नियमित निगरानी भी जरूरी है। रेलवे से जुड़ी पिछली कैग जांचों में भी निर्धारित सुविधाओं और वास्तविक उपलब्धता के बीच अंतर दर्ज किया गया है। उदाहरण के लिए, पुराने निरीक्षणों में कई स्टेशनों पर निर्धारित मानकों के अनुरूप पेयजल नल और जल शीतलक उपलब्ध नहीं पाए गए थे।
शौचालयों की गंदगी ने भी उठाए सवाल
पेयजल के साथ-साथ शौचालयों की सफाई और रखरखाव भी कैग की जांच में महत्वपूर्ण चिंता के रूप में सामने आया है। रेलवे स्टेशन पर शौचालय ऐसी बुनियादी सुविधा है जिसका इस्तेमाल बड़ी संख्या में यात्री करते हैं और जिसकी खराब स्वच्छता सीधे संक्रमण तथा स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को बढ़ा सकती है। रेलवे की लंबी दूरी की ट्रेनों में स्वच्छता को लेकर भी कैग ने पहले यात्रियों की असंतुष्टि और शिकायतों का अध्ययन किया था। 2025 की एक कैग रिपोर्ट में 2,426 यात्रियों के सर्वेक्षण के दौरान कई जोन में स्वच्छता को लेकर असंतोष दर्ज किया गया था। इससे स्पष्ट है कि स्टेशन और ट्रेन दोनों स्तरों पर स्वच्छता व्यवस्था को केवल निर्माण या सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय उसके नियमित रखरखाव से जोड़ना जरूरी है।
रिपोर्ट के बाद रेल मंत्री ने लिया तत्काल संज्ञान
कैग की रिपोर्ट सामने आने के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय के अनुसार उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पूरे दिन स्थिति की समीक्षा की और जल गुणवत्ता से संबंधित कमियों को दूर करने के लिए कई उपायों पर जोर दिया। इनमें पानी को साफ करने वाली प्रणाली की स्थापना, पुरानी या अनुपयुक्त पानी की टंकियों को बदलना और पेयजल की नियमित जांच शामिल है। यह प्रतिक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कैग की रिपोर्ट ने केवल कमियां दर्ज नहीं कीं, बल्कि उन व्यवस्थाओं की ओर भी ध्यान खींचा जिनके जरिए यात्रियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
पानी की टंकियों और शोधन व्यवस्था पर होगा जोर
रेलवे स्टेशनों पर पेयजल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए केवल नल या जल शीतलक उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। पानी के स्रोत से लेकर भंडारण टंकियों, शोधन प्रणाली और यात्रियों तक पहुंचने वाले वितरण बिंदु तक पूरी श्रृंखला की निगरानी जरूरी होती है। कैग की पिछली रिपोर्टों में भी जल गुणवत्ता की नियमित जांच और जल शोधन व्यवस्था से जुड़ी कमियां सामने आ चुकी हैं। एक पूर्व रेलवे ऑडिट में कुछ चयनित स्टेशनों पर रासायनिक और जीवाणु संबंधी जांच में कमियां तथा दूषित जल की स्थिति में सुधारात्मक कार्रवाई में देरी दर्ज की गई थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि नई व्यवस्था को केवल तत्काल प्रतिक्रिया तक सीमित रखने के बजाय नियमित निगरानी और जवाबदेही के ढांचे में बदलना होगा।
नियमित जल जांच को बनाना होगा प्रभावी
पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में नियमित नमूना जांच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि किसी स्टेशन पर पानी की जांच समय पर नहीं होती या जांच के बाद सामने आई समस्या पर तुरंत कार्रवाई नहीं की जाती, तो यात्रियों के स्वास्थ्य पर जोखिम बना रह सकता है। रेलवे के स्वास्थ्य संबंधी नियमों में महत्वपूर्ण स्टेशनों से जल के जीवाणु संबंधी नमूने नियमित अंतराल पर लेने की व्यवस्था पहले से रही है। कैग की रिपोर्ट में कुछ स्टेशनों पर निर्धारित जांच न होने का उल्लेख इसी निगरानी व्यवस्था की कमजोरी की ओर संकेत करता है। इसलिए सुधारात्मक कदमों में केवल नए उपकरण लगाना नहीं, बल्कि जांच की समय-सारिणी, नमूना संग्रह, प्रयोगशाला परीक्षण और खराब परिणाम आने पर तत्काल सुधार की जवाबदेही तय करना भी जरूरी होगा।
पुराने ऑडिट भी बता चुके हैं कि समस्या नई नहीं
रेलवे में पेयजल और स्वच्छता से जुड़ी कमियां पहली बार सामने नहीं आई हैं। कैग की 2016 की एक रिपोर्ट में 436 चयनित स्टेशनों की जांच के दौरान 86 स्टेशनों पर निर्धारित मानकों के अनुरूप पेयजल नल उपलब्ध नहीं पाए गए थे। एक अन्य रिपोर्ट में कुछ स्टेशनों पर जल शीतलकों की उपलब्धता निर्धारित आवश्यकता से काफी कम होने और जल गुणवत्ता की जांच में खामियों का उल्लेख किया गया था। इससे संकेत मिलता है कि समस्या केवल किसी एक अवधि या किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही है। नई रिपोर्ट के बाद चुनौती यह है कि पुराने निरीक्षणों में सामने आई कमियों से सीख लेते हुए इस बार सुधारात्मक निर्देशों को स्थायी व्यवस्था और प्रभावी निगरानी में बदला जाए।
यात्रियों की सुविधा अब केवल घोषणा नहीं, क्रियान्वयन की कसौटी
रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं के लिए नियम और मानक लंबे समय से मौजूद हैं, लेकिन कैग की रिपोर्ट ने उनके जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल उठाया है। किसी स्टेशन पर साफ शौचालय, सुरक्षित पेयजल, पर्याप्त जल शीतलक और नियमित सफाई की व्यवस्था होना यात्रियों के लिए मूलभूत आवश्यकता है। खासकर गर्मी, त्योहारों और भीड़भाड़ वाले समय में इन सुविधाओं की मांग कई गुना बढ़ जाती है। इसलिए रेलवे के लिए चुनौती केवल कमियों को ठीक करने की नहीं, बल्कि ऐसी निगरानी व्यवस्था तैयार करने की है जिसमें खराब पानी, गंदे शौचालय या बंद पड़ी सुविधाओं की जानकारी अधिकारियों तक समय रहते पहुंचे और जिम्मेदार एजेंसी पर तत्काल कार्रवाई हो।
अब सुधार के आदेश का असर जमीन पर दिखना जरूरी
कैग की रिपोर्ट ने रेलवे के सामने एक स्पष्ट चुनौती रखी है और रेल मंत्रालय ने भी तत्काल सुधारात्मक कदमों के निर्देश देकर इसका संज्ञान लिया है। अब असली परीक्षा इन निर्देशों के जमीन पर लागू होने की होगी। पानी की टंकियों का रखरखाव, शोधन प्रणाली की उपलब्धता, नियमित जल परीक्षण और शौचालयों की सफाई को लेकर यदि जवाबदेही तय होती है, तो यात्रियों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है। रेलवे जैसे विशाल नेटवर्क में किसी एक आदेश का प्रभाव तभी दिखाई देगा जब उसे सभी जोन और मंडलों में समान गंभीरता से लागू किया जाए। यात्रियों के लिए सुरक्षित पेयजल और स्वच्छ शौचालय कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की बुनियादी जिम्मेदारी हैं; कैग की रिपोर्ट के बाद अब इस जिम्मेदारी के निर्वहन की निगरानी और भी महत्वपूर्ण हो गई है।