नई दिल्ली: दिल्ली से उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख शहरों तक सफर करने वाले यात्रियों के लिए हाईस्पीड रेल को लेकर बड़ी योजना सामने आई है। प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर को आगे पटना तक बढ़ाने की योजना है। इस कॉरिडोर के जरिए देश की राजधानी को आगरा, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और पटना जैसे महत्वपूर्ण शहरों से जोड़ा जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक कार्यक्रम के दौरान इस प्रस्तावित कॉरिडोर के संभावित मार्ग और अलग-अलग शहरों तक पहुंचने में लगने वाले समय की जानकारी साझा की। अगर यह परियोजना तय योजना के अनुसार आगे बढ़ती है, तो उत्तर भारत में लंबी दूरी की यात्रा का तरीका काफी बदल सकता है।
कई बड़े शहरों को एक हाईस्पीड नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी
प्रस्तावित हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की शुरुआत दिल्ली से होगी और इसका मार्ग उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगा। इसमें आगरा, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज और वाराणसी जैसे शहर शामिल हैं। आगे इस नेटवर्क को बिहार की राजधानी पटना तक ले जाने का प्रस्ताव है। इस कनेक्टिविटी से राजधानी दिल्ली और उत्तर भारत के प्रमुख आर्थिक, औद्योगिक, धार्मिक तथा पर्यटन केंद्रों के बीच तेज परिवहन सुविधा उपलब्ध हो सकती है। आगरा जैसे पर्यटन शहर को इसका खास फायदा मिलने की उम्मीद है। वहीं कानपुर और लखनऊ जैसे बड़े शहरों के लिए दिल्ली तक पहुंचना आसान और तेज हो सकता है। प्रयागराज और वाराणसी जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र भी हाईस्पीड रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे।
दिल्ली से आगरा पहुंचने में लगेंगे सिर्फ 58 मिनट
इस प्रस्तावित कॉरिडोर की सबसे खास बात दिल्ली से आगरा के बीच यात्रा का समय है। योजना के मुताबिक करीब 200 किलोमीटर की दूरी हाईस्पीड ट्रेन से महज 58 मिनट में तय की जा सकती है। मौजूदा समय में सड़क और पारंपरिक रेल सेवाओं से इस दूरी को तय करने में इससे काफी अधिक समय लग सकता है। बुलेट ट्रेन शुरू होने पर दिल्ली से आगरा जाने वाले यात्रियों को तेज और सुविधाजनक विकल्प मिल सकता है। आगरा देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है, जहां हर साल बड़ी संख्या में घरेलू और विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में हाईस्पीड कनेक्टिविटी पर्यटन क्षेत्र के लिए भी अहम साबित हो सकती है। दिल्ली-आगरा के बीच तेज संपर्क से दोनों शहरों के बीच आवागमन और पर्यटन गतिविधियों में बढ़ोतरी की संभावना है।
कानपुर और लखनऊ की दूरी भी होगी कम
कॉरिडोर के अगले हिस्से में कानपुर और लखनऊ को हाईस्पीड रेल से जोड़ने का प्रस्ताव है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दिल्ली से कानपुर तक का सफर लगभग 1 घंटे 50 मिनट में पूरा करने का लक्ष्य है। वहीं दिल्ली से लखनऊ की करीब 495 किलोमीटर दूरी लगभग 2 घंटे 12 मिनट में तय की जा सकती है। वर्तमान यात्रा समय की तुलना में यह काफी तेज कनेक्टिविटी होगी। लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी होने के साथ प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और कारोबार का बड़ा केंद्र है। कानपुर राज्य का प्रमुख औद्योगिक शहर है और बड़ी संख्या में लोग रोजगार तथा व्यापार के लिए यहां आते-जाते हैं। हाईस्पीड रेल शुरू होने से इन दोनों शहरों और दिल्ली के बीच दैनिक तथा व्यावसायिक आवाजाही को गति मिलने की उम्मीद है।
प्रयागराज और वाराणसी भी हाईस्पीड रेल से जुड़ेंगे
प्रस्तावित रूट में प्रयागराज और वाराणसी को भी महत्वपूर्ण पड़ाव के तौर पर शामिल किया गया है। जानकारी के मुताबिक दिल्ली से प्रयागराज की करीब 750 किलोमीटर दूरी लगभग 3 घंटे में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं दिल्ली से वाराणसी की लगभग 945 किलोमीटर दूरी करीब 3 घंटे 33 मिनट में तय होने का अनुमान है। प्रयागराज धार्मिक, ऐतिहासिक और शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है। दूसरी ओर वाराणसी देश और दुनिया के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों में गिना जाता है। तेज रेल संपर्क से इन शहरों में आने वाले यात्रियों को बड़ा फायदा मिल सकता है। इसके अलावा कारोबार, शिक्षा और रोजगार से जुड़े लोगों के लिए दिल्ली और इन शहरों के बीच यात्रा अधिक सुविधाजनक होने की संभावना है।
दिल्ली से पटना तक करीब साढ़े चार घंटे में सफर का लक्ष्य
प्रस्तावित हाईस्पीड रेल नेटवर्क का विस्तार पटना तक करने की योजना इसे और महत्वपूर्ण बनाती है। बताया गया है कि दिल्ली से पटना की करीब 1,170 किलोमीटर दूरी बुलेट ट्रेन से लगभग 4 घंटे 30 मिनट में तय करने का लक्ष्य है। फिलहाल इतनी लंबी दूरी की यात्रा में यात्रियों को काफी समय खर्च करना पड़ता है। हाईस्पीड रेल सेवा शुरू होने पर दिल्ली और बिहार की राजधानी के बीच तेज संपर्क स्थापित हो सकता है। इससे बिहार से दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों के साथ कारोबारी और पेशेवर वर्ग को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। पटना के अलावा इस कॉरिडोर से जुड़े शहरों को भी एक बड़े हाईस्पीड नेटवर्क का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा। हालांकि, प्रस्तावित परियोजना के अंतिम स्वरूप, निर्माण और संचालन से जुड़े फैसले आगे की प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होंगे।
उत्तर भारत में बदल सकती है रेल यात्रा की तस्वीर
दिल्ली से पटना तक प्रस्तावित यह हाईस्पीड रेल कॉरिडोर केवल यात्रा का समय कम करने वाली परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर भारत की कनेक्टिविटी को नया स्वरूप देने वाली योजना के तौर पर देखा जा रहा है। एक ही नेटवर्क के जरिए पर्यटन, उद्योग, शिक्षा, रोजगार और धार्मिक स्थलों को जोड़ने का फायदा व्यापक स्तर पर मिल सकता है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच तेज परिवहन व्यवस्था बनने से क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। प्रस्तावित समय के मुताबिक कई शहरों के बीच घंटों का सफर कुछ घंटों तक सिमट सकता है। देश में हाईस्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है। फिलहाल यह परियोजना प्रस्तावित चरण में है और इसके अंतिम रूट, निर्माण कार्यक्रम तथा संचालन को लेकर आधिकारिक स्तर पर आगे की जानकारी का इंतजार रहेगा।