पटना - झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन लगातार राजनीतिक और सामाजिक समर्थन हासिल कर रहा है। अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विधायक मैथिली ठाकुर ने भी छात्रों के पक्ष में आवाज उठाते हुए राज्य सरकार से प्रदर्शनकारी युवाओं के साथ जल्द संवाद शुरू करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है और सरकार को छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए।
सरकार छात्रों से बातचीत करे: मैथिली ठाकुर
अलीनगर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक मैथिली ठाकुर ने कहा कि झारखंड में छात्र लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठा रहे हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह प्रदर्शन कर रहे युवाओं से बातचीत करे और उनकी शिकायतों का समाधान निकालने का प्रयास करे। मैथिली ठाकुर ने कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया पर आंदोलन से जुड़े कई वीडियो, भाषण और पोस्ट देखे हैं। उनके अनुसार, छात्रों का आचरण बेहद अनुशासित और शांतिपूर्ण रहा है, जो लोकतांत्रिक विरोध का एक सकारात्मक उदाहरण है।
लोकतंत्र में विरोध का अधिकार, लेकिन व्यवस्था भी जरूरी
भाजपा विधायक ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने और अपनी मांगों के लिए आवाज उठाने का अधिकार है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि विरोध का एक मर्यादित और शांतिपूर्ण तरीका होना चाहिए, और झारखंड के छात्रों ने जिस संयम के साथ आंदोलन किया है, वह सराहनीय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार जल्द ही छात्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर कोई सकारात्मक समाधान निकालेगी।
भविष्य में विवाद रोकने के लिए नियम बनाने की मांग
मैथिली ठाकुर ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर बार-बार विवाद सामने आना चिंता का विषय है। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में ऐसी स्थितियां पैदा न हों, इसके लिए सरकार को स्पष्ट और मजबूत नियम बनाने चाहिए। उनका मानना है कि पारदर्शी भर्ती व्यवस्था ही युवाओं का विश्वास कायम रख सकती है।
क्या है झारखंड का छात्र आंदोलन?
झारखंड में JPSC, JSSC-CGL और अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, अनियमितताओं और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र पिछले करीब दो सप्ताह से आंदोलन कर रहे हैं। राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र लगातार धरना दे रहे हैं। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई, विवादित भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा और भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था लागू करना शामिल है।
बढ़ता जा रहा है आंदोलन को समर्थन
छात्र आंदोलन को अब विभिन्न सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों और राजनीतिक दलों के नेताओं का समर्थन मिलने लगा है। इससे सरकार पर आंदोलनकारियों से बातचीत कर समाधान निकालने का दबाव भी बढ़ रहा है। फिलहाल सभी की नजर राज्य सरकार की अगली कार्रवाई और संभावित वार्ता पर टिकी हुई है।