कोलकाता: 9 मई को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ। इस ऐतिहासिक मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में जिस आवाज ने सबका ध्यान खींचा, वह थी मशहूर एंकर मधुमंती मैत्रा की। कोलकाता दूरदर्शन की पूर्व समाचार वाचिका मधुमंती ने अपनी सधी हुई एंकरिंग से न केवल दर्शकों बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी खूब वाहवाही बटोरी।
'बिना तैयारी के संभाला मंच'
तारीफों के बीच मधुमंती ने खुलासा किया कि इस बड़े आयोजन के लिए उनके पास कोई पूर्व तैयारी (Script) नहीं थी। उन्होंने बताया, "मैंने जो कुछ भी कहा वह तात्कालिक था। प्रधानमंत्री के आगमन और उनके मंच पर जाने का कोई निश्चित कार्यक्रम मुझे नहीं दिया गया था। ब्रिगेड जैसी जगह पर इतने बड़े स्तर का सरकारी कार्यक्रम करना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन एक एंकर के तौर पर मैं किसी भी स्थिति के लिए तैयार थी।"
2011 के बाद शुरू हुआ 'वनवास'
मधुमंती ने अपनी पुरानी यादें साझा करते हुए बताया कि वह कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत से लेकर 2010 तक इसकी नियमित एंकर रही थीं। लेकिन 2011 में राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद उन्हें दरकिनार कर दिया गया। उन्होंने कहा, "2011 के बाद फिल्म फेस्टिवल जब 'उत्सव' में बदला, तो मेरी जगह जून माल्या ने ले ली। मुझे कई जगहों से हटा दिया गया था।" हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे इसे 'दबाए जाने' की तरह नहीं देखतीं, बल्कि यह वक्त का फेर था।
प्रधानमंत्री मोदी से पुराना नाता
मधुमंती के लिए पीएम मोदी के कार्यक्रम का संचालन करना नया नहीं है। उन्होंने कहा कि कोलकाता में प्रधानमंत्री के लगभग सभी सरकारी कार्यक्रमों में उन्होंने एंकरिंग की है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, "शायद वे मेरा चेहरा पहचानते होंगे, लेकिन मेरा नाम जानते हैं या नहीं, इसमें मुझे संदेह है।"
'प्रत्यावर्तन' शब्द पर आपत्ति
सोशल मीडिया पर लोग इसे मधुमंती की 'वापसी' (प्रत्यावर्तन) कह रहे हैं, लेकिन उन्हें इस शब्द से आपत्ति है। उनका मानना है कि वे सालों से अपना काम कर रही हैं, बस अब केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने उन पर भरोसा जताया है। राज्य में फिर से हुए बदलाव के बाद उन्हें काम मिलने की उम्मीद तो है, लेकिन वे इसे लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित होने के बजाय सहज रहना पसंद कर रही हैं।