नई दिल्ली - देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) अब परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। नीट-यूजी पेपर लीक प्रकरण के बाद एजेंसी की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों के बीच एनटीए ने प्रशासनिक और तकनीकी ढांचे को मजबूत करने की व्यापक योजना तैयार की है। इसका उद्देश्य भविष्य में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, पेपर लीक या साइबर हमले जैसी घटनाओं को रोकना है।
10 अहम क्षेत्रों के विशेषज्ञों की होगी नियुक्ति
नई योजना के तहत एनटीए विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक क्षेत्रों में विशेषज्ञों की भर्ती करेगा। इनमें साइबर सिक्योरिटी, टेस्ट सिक्योरिटी, लाइव ऑपरेशन, विजिलेंस, इन्वेस्टिगेशन, फॉरेंसिक, जोखिम प्रबंधन, परीक्षा संचालन और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों के प्रोफेशनल्स शामिल होंगे। इन विशेषज्ञों को महाप्रबंधक (General Manager) स्तर पर नियुक्त किया जाएगा ताकि परीक्षा संचालन के हर चरण की निगरानी विशेषज्ञ स्तर पर हो सके। इनमें से कई पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि शेष पदों के लिए जल्द ही आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।
उच्चस्तरीय समिति की सिफारिश पर लिया गया फैसला
एनटीए ने यह निर्णय उस उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया है, जिसका गठन परीक्षा प्रणाली की समीक्षा के लिए किया गया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि आधुनिक तकनीक और संगठित परीक्षा माफिया से निपटने के लिए केवल पारंपरिक व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। इसके लिए साइबर सुरक्षा, डेटा विश्लेषण और जांच से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञों की स्थायी उपलब्धता आवश्यक है।
पहले चरण में निकली कई पदों पर भर्ती
फिलहाल एजेंसी ने प्रशासनिक और तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े लगभग एक दर्जन पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। इन नियुक्तियों का प्रारंभिक कार्यकाल तीन वर्ष का होगा और इन्हें संविदा के आधार पर रखा जाएगा। हालांकि भविष्य में इन विशेषज्ञ पदों को नियमित रूप से बनाए रखने की भी योजना है, ताकि परीक्षा प्रणाली लगातार मजबूत बनी रहे। इसके अलावा एनटीए वैश्विक स्तर पर अपनाई जा रही परीक्षा सुरक्षा तकनीकों का अध्ययन करने और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए भी एक वरिष्ठ विशेषज्ञ नियुक्त करने की तैयारी कर रहा है।
पहले भी शुरू किए जा चुके हैं सुधार
यह पहली बार नहीं है जब एनटीए ने अपने ढांचे में बदलाव की पहल की हो। इससे पहले एजेंसी चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) और चीफ फाइनेंस ऑफिसर (CFO) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया भी शुरू कर चुकी है। साथ ही 16 युवा प्रोफेशनल्स की भर्ती का निर्णय भी लिया गया है, जिनकी नियुक्ति संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के माध्यम से की जाएगी।
नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में टास्क फोर्स कर रही काम
परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए केंद्र सरकार ने इंफोसिस के सह-संस्थापक और आधार परियोजना के प्रमुख रहे नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में छह सदस्यीय टास्क फोर्स का गठन किया है। यह टीम परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, डिजिटल और पारदर्शी बनाने के उपायों पर काम कर रही है। टास्क फोर्स की हाल ही में एक वर्चुअल बैठक भी हुई है और माना जा रहा है कि आगामी प्रवेश परीक्षाओं से पहले इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी जा सकती है। रिपोर्ट में तकनीकी सुरक्षा, डिजिटल निगरानी, परीक्षा केंद्रों की मॉनिटरिंग और डेटा सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव शामिल होने की संभावना है।
परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो भविष्य में पेपर लीक, साइबर हमलों और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी। साथ ही छात्रों और अभिभावकों का राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं पर विश्वास भी मजबूत होगा। सरकार और एनटीए का लक्ष्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है जो पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित हो।