नई दिल्ली. पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अभी से अपनी रणनीतिक तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी का जोर केवल चुनावी प्रचार तक सीमित रहने के बजाय संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर दिखाई दे रहा है। राष्ट्रीय महासचिव बी. एल. संतोष के 2 दिवसीय पंजाब दौरे के दौरान पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ हुई बैठकों ने यह संकेत दिया कि बीजेपी चुनाव के नजदीक आने का इंतजार करने के मूड में नहीं है। पार्टी की कोशिश है कि अगले लंबे राजनीतिक दौर का इस्तेमाल संगठन विस्तार, जनसंपर्क और स्थानीय मुद्दों की पहचान के लिए किया जाए। इसी रणनीति के तहत कार्यकर्ताओं को विधानसभा क्षेत्रों से लेकर बूथ स्तर तक सक्रिय करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
लुधियाना बैठक में बूथ स्तर तक पहुंचने पर जोर
लुधियाना में पंजाब बीजेपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ हुई बैठक में संगठनात्मक ढांचे को मजबूत बनाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। बी. एल. संतोष ने पार्टी को बूथ स्तर तक सक्रिय और प्रभावी बनाने पर जोर दिया, क्योंकि किसी भी विधानसभा चुनाव में स्थानीय संगठन की भूमिका निर्णायक मानी जाती है। बीजेपी की योजना प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने और पार्टी की पहुंच को गांवों तथा शहरी इलाकों तक मजबूत करने की बताई जा रही है। चुनावी तैयारियों के इस शुरुआती चरण में पार्टी नेतृत्व स्थानीय मुद्दों, सामाजिक समीकरणों और मतदाताओं की प्राथमिकताओं को समझने पर भी ध्यान केंद्रित कर सकता है। संगठनात्मक मजबूती के जरिए बीजेपी पंजाब में अपनी राजनीतिक स्थिति को विस्तार देने की कोशिश कर रही है।
सितंबर में सभी 117 सीटों तक पहुंचेगा नशे के खिलाफ अभियान
बीजेपी ने सितंबर में पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर नशे के खिलाफ यात्राएं निकालने का फैसला किया है। पार्टी की योजना इस अभियान को केवल राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में सीमित रखने के बजाय सामाजिक चिंता से जुड़े व्यापक मुद्दे के तौर पर जनता के बीच ले जाने की है। इन यात्राओं में दिल्ली से पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने या कार्यक्रमों का नेतृत्व करने की संभावना जताई गई है। बीजेपी का मानना है कि नशे की समस्या पंजाब के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को प्रभावित करने वाला गंभीर विषय है, इसलिए इसे व्यापक जनसंपर्क अभियान से जोड़ा जा सकता है। पार्टी इस मुद्दे के जरिए अलग-अलग सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों तक अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
पंजाब की राजनीति में लंबे समय से अहम रहा है नशे का सवाल
नशे का मुद्दा पंजाब की राजनीति में पिछले कई वर्षों से प्रमुख चुनावी और सामाजिक विषयों में शामिल रहा है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने नशे के खिलाफ कार्रवाई को अपने प्रमुख मुद्दों में शामिल किया था और सत्ता में पहुंची थी। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने भी नशे की समस्या को समाप्त करने के वादे को प्रमुखता से उठाया। इस पृष्ठभूमि में बीजेपी भी नशे के मुद्दे को अपनी राजनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रही है। पार्टी की कोशिश है कि कानून-व्यवस्था, युवाओं के भविष्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े सवालों को एक व्यापक राजनीतिक संदेश के रूप में मतदाताओं तक पहुंचाया जाए।
केंद्र के नशा विरोधी अभियान से जोड़ेगी राजनीतिक रणनीति
बीजेपी की पंजाब रणनीति को केंद्र सरकार के नशा विरोधी अभियान से भी जोड़कर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अगस्त को 100 सप्ताह तक चलने वाले देशव्यापी नशा विरोधी अभियान के तहत ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ शुरू किया था। पंजाब बीजेपी अब इस व्यापक अभियान के संदेश को राज्य के राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ में आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकती है। पार्टी नेताओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने और जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है। ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से भी आम लोगों को जोड़ने की रणनीति पर काम हो सकता है, ताकि राष्ट्रीय स्तर के संदेशों को स्थानीय संगठनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जा सके।
धार्मिक और पहचान आधारित राजनीति से आगे नया संदेश बनाने की कोशिश
पंजाब की राजनीति में लंबे समय से धार्मिक, सामाजिक पहचान और समुदाय से जुड़े मुद्दों का महत्वपूर्ण प्रभाव रहा है। बेअदबी, बंदी सिख और सिख समुदाय से जुड़े विभिन्न विषय समय-समय पर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहे हैं। ऐसे माहौल में बीजेपी नशे जैसी सामाजिक समस्या को आगे रखकर एक अपेक्षाकृत व्यापक राजनीतिक संदेश तैयार करने की कोशिश कर रही है। पार्टी का आकलन है कि नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग शहरों और गांवों के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक और आर्थिक वर्गों के बीच समर्थन जुटाने का आधार बन सकती है। इस रणनीति के जरिए बीजेपी पारंपरिक राजनीतिक मुद्दों के साथ-साथ युवाओं, परिवारों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को भी अपने अभियान का हिस्सा बनाना चाहती है।
2027 की जंग के लिए अभी से जमीन तैयार करने की कवायद
बीजेपी की मौजूदा गतिविधियां संकेत देती हैं कि पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक मुकाबले की तैयारी काफी पहले शुरू हो चुकी है। बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने, नशे के खिलाफ राज्यव्यापी यात्राएं निकालने और राष्ट्रीय अभियानों को स्थानीय मुद्दों से जोड़ने की रणनीति पार्टी के दीर्घकालिक चुनावी खाके का हिस्सा दिखाई देती है। हालांकि चुनाव अभी दूर है और पंजाब की राजनीति में समीकरण समय के साथ बदल सकते हैं, लेकिन बीजेपी फिलहाल लगातार जनसंपर्क और संगठन विस्तार के माध्यम से अपनी जमीन तैयार करने में जुटी है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नशे का मुद्दा पार्टी के लिए कितना प्रभावी राजनीतिक आधार बनता है और अन्य दल इसके जवाब में अपनी रणनीति को किस तरह आकार देते हैं।