कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राम नवमी का पर्व इस बार पूरी तरह से राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में बदल गया। राजधानी कोलकाता समेत पूरे राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने रैलियों और शोभायात्राओं के जरिए अपनी ताकत दिखाई।
भवानीपुर, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का निर्वाचन क्षेत्र है, वहां नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने भव्य राम नवमी शोभायात्रा का नेतृत्व किया। भगवा कुर्ता पहने अधिकारी ‘जय श्री राम’ के नारों के बीच लोगों से मिले और राज्य में बदलाव की अपील की।
उन्होंने कहा, “हम बंगाल में रामराज्य चाहते हैं—रोजगार, अच्छा शासन, महिलाओं की सुरक्षा और हर व्यक्ति के लिए सम्मान।” यह रैली हाजरा क्रॉसिंग तक पहुंची, जो मुख्यमंत्री के घर के पास स्थित है।
शाम को अधिकारी ने एंटाली के रामलीला मैदान से एक और रैली निकाली, जबकि खड़गपुर से BJP नेता दिलीप घोष ने बाइक रैली में हिस्सा लिया।
TMC का ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ जवाब
BJP के मुकाबले में TMC भी पीछे नहीं रही। पार्टी नेता कुणाल घोष और मदन मित्रा अलग-अलग कार्यक्रमों में राम नवमी समारोह में शामिल हुए।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर लोगों को बधाई देते हुए शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि राम किसी एक पार्टी के नहीं, बल्कि सभी के हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह BJP के हिंदुत्व एजेंडे के मुकाबले में TMC की ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ रणनीति का हिस्सा है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
राम नवमी के मौके पर पूरे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
- कोलकाता में 60 से अधिक रैलियां निकाली गईं
- हावड़ा, हुगली समेत संवेदनशील जिलों में ड्रोन और CCTV से निगरानी
- हजारों पुलिसकर्मी और केंद्रीय बल (CRPF) तैनात
पिछले वर्षों में हुई घटनाओं को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा।
यूनिवर्सिटीज में भी आयोजन
कोलकाता के जादवपुर यूनिवर्सिटी और कलकत्ता यूनिवर्सिटी में भी राम नवमी मनाई गई। ABVP ने कैंपस में पूजा का आयोजन किया, जिससे छात्र राजनीति भी सक्रिय नजर आई।
विपक्ष का हमला
वामदलों और कांग्रेस ने BJP और TMC दोनों पर निशाना साधा। CPIM नेताओं ने आरोप लगाया कि बंगाल की सांस्कृतिक परंपरा पर “आक्रामक धार्मिक राजनीति” थोपी जा रही है, जबकि TMC पर BJP की राह पर चलने का आरोप लगाया।