नई दिल्ली: Supreme Court of India ने चंबल घड़ियाल अभयारण्य में लगातार बढ़ रहे अवैध रेत खनन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने Uttar Pradesh, Madhya Pradesh और Rajasthan सरकारों को तुरंत प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि अवैध खनन रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करना और वन विभाग में खाली पड़े पदों पर भर्ती करना बेहद जरूरी है।
फर्जी नंबर वाले वाहनों पर कार्रवाई के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मुरैना जिले में बिना नंबर और बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों से हो रही अवैध रेत ढुलाई की मीडिया रिपोर्ट पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि यदि रिपोर्ट सही है तो अधिकारियों ने कोर्ट में गलत हलफनामा दाखिल किया है। कोर्ट ने ऐसे वाहनों को जब्त करने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
CCTV और कंट्रोल सेंटर लगाने के आदेश
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने तीनों राज्यों को प्रभावित इलाकों में सीसीटीवी कैमरे, कंट्रोल सेंटर और मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने को कहा है। अदालत ने निर्देश दिया कि छह महीने के भीतर निगरानी व्यवस्था पूरी तरह से सक्रिय कर दी जाए। कोर्ट ने कहा कि अवैध खनन रोकने के लिए टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी बेहद जरूरी है।
सिर्फ ड्राइवर नहीं, मालिकों पर भी कार्रवाई
अदालत ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अवैध खनन नेटवर्क से जुड़े वाहन मालिकों, ठेकेदारों और अन्य लोगों के खिलाफ भी आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए। कोर्ट ने वन विभाग के कर्मचारियों पर बढ़ते हमलों को लेकर भी चिंता जताई और फील्ड स्टाफ बढ़ाने पर जोर दिया।
स्थानीय लोगों के रोजगार पर भी जोर
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को सुझाव दिया कि प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए रोजगार योजनाएं और स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू किए जाएं। अदालत ने स्थानीय समुदायों को संरक्षण, वृक्षारोपण, इको-टूरिज्म और निगरानी गतिविधियों से जोड़ने की संभावनाएं तलाशने को कहा।
क्यों अहम है चंबल अभयारण्य?
National Chambal Sanctuary करीब 5400 वर्ग किलोमीटर में फैला संरक्षित क्षेत्र है, जो दुर्लभ घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन और रेड क्राउन रूफ टर्टल जैसे संकटग्रस्त जीवों का घर माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लगातार हो रहा अवैध खनन इस संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।