नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सोमवार को केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सभी प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल MDR व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।
UPI चार्ज को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा UPI P2M भुगतान पर MDR लगाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में इस नई व्यवस्था के कानूनी आधार और इसके असर को लेकर सवाल उठाए गए हैं। सुनवाई के दौरान पीठ ने केंद्र सरकार और RBI से इस मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा। कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। हालांकि, अदालत ने अभी नई MDR व्यवस्था पर रोक नहीं लगाई है। ऐसे में फिलहाल तय व्यवस्था के मुताबिक यह शुल्क लागू होने की प्रक्रिया जारी रहेगी। मामले की अगली सुनवाई में सरकार और अन्य पक्षों के जवाब के बाद कोर्ट आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा।
कोर्ट ने पूछा- UPI चार्ज से किसे होगा फायदा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने MDR को लेकर कई अहम सवाल भी उठाए। पीठ ने केंद्र और RBI से पूछा कि ₹2,000 से ज्यादा के UPI भुगतान पर लगाए जाने वाले इस शुल्क से आखिर किसे फायदा होगा। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि इस व्यवस्था में कोई टैक्स देने वाली संस्था शामिल है या नहीं। इसके साथ ही पीठ ने सवाल किया कि यह शुल्क वास्तव में फीस है या इसे किसी तरह के टैक्स के रूप में देखा जाना चाहिए। इन सवालों के जरिए अदालत ने MDR की प्रकृति और इससे जुड़ी व्यवस्था को स्पष्ट करने की जरूरत पर जोर दिया। केंद्र सरकार को अब अपने जवाबी हलफनामे में इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
केंद्र का दावा- 96 फीसदी यूजर्स नहीं होंगे प्रभावित
केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमण ने अदालत को बताया कि नई MDR व्यवस्था का असर UPI के करीब 96 प्रतिशत उपयोगकर्ताओं के लेनदेन पर नहीं पड़ेगा। सरकार के मुताबिक, यह शुल्क सभी UPI भुगतानों पर लागू नहीं किया गया है। नई व्यवस्था मुख्य रूप से ₹2,000 से अधिक के पात्र व्यक्ति-से-व्यापारी यानी P2M लेनदेन पर लागू होगी। व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी P2P भुगतान को इस शुल्क से बाहर रखा गया है। इसी तरह छोटे मूल्य के UPI लेनदेन पर भी शुल्क नहीं लगाया गया है। सरकार का कहना है कि इस वजह से बड़ी संख्या में रोजमर्रा के UPI भुगतान पहले की तरह बिना शुल्क जारी रहेंगे।
₹2,000 से ज्यादा P2M भुगतान पर 0.4% MDR
नई व्यवस्था के तहत ₹2,000 से अधिक के पात्र P2M UPI लेनदेन पर सामान्य तौर पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाएगा। यह शुल्क सीधे ग्राहक से वसूलने के बजाय मर्चेंट भुगतान व्यवस्था के भीतर लिया जाएगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 तय की गई है। यानी बड़ी राशि के भुगतान पर भी निर्धारित सीमा से ज्यादा MDR नहीं लिया जाएगा। यह व्यवस्था मुख्य रूप से उन भुगतानों पर लागू है, जिनमें ग्राहक किसी व्यापारी को UPI के जरिए भुगतान करता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता से सीधे MDR वसूलने का प्रावधान नहीं है।
15 अक्टूबर से लागू होने वाली है नई व्यवस्था
सरकार ने करीब छह साल तक पूरी तरह मुफ्त रही UPI भुगतान व्यवस्था में बदलाव करते हुए नई MDR व्यवस्था घोषित की है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने वाली है। इसके तहत ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा P2M भुगतानों पर MDR लगाया जाएगा। वहीं, ₹2,000 तक के भुगतान और व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी P2P ट्रांसफर को शुल्क से बाहर रखा गया है। सरकार के अनुसार, उपभोक्ताओं से सीधे कोई UPI लेनदेन शुल्क नहीं लिया जाएगा। नई व्यवस्था को लेकर व्यापारियों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और डिजिटल भुगतान प्रणाली पर इसके संभावित असर को लेकर चर्चा जारी है।
रेलवे, ईंधन और कुछ क्षेत्रों में ₹5 तय शुल्क
कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए MDR की अलग व्यवस्था की गई है। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि आदानों जैसे क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के पात्र लेनदेन पर ₹5 का तय MDR लिया जाएगा। इन क्षेत्रों में सामान्य 0.4 प्रतिशत MDR के बजाय निश्चित शुल्क का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों में लेनदेन लागत को एक निर्धारित सीमा में रखना है। वहीं, म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों और शेयर ब्रोकर या डीलर के माध्यम से किए जाने वाले भुगतान के लिए 0.02 प्रतिशत MDR का प्रावधान बताया गया है। इन लेनदेन पर भी अधिकतम MDR की सीमा ₹300 रखी गई है।
P2P UPI भुगतान पर कोई शुल्क नहीं
नई व्यवस्था में व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी P2P UPI भुगतान को पूरी तरह शुल्क से बाहर रखा गया है। इसका मतलब है कि किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को UPI के जरिए पैसा भेजने पर भुगतान की राशि चाहे जितनी हो, MDR नहीं लगेगा। यह व्यवस्था मुख्य रूप से व्यापारी को किए जाने वाले P2M भुगतान पर केंद्रित है। रोजमर्रा में दोस्तों, परिवार या अन्य व्यक्तियों को किए जाने वाले सामान्य UPI ट्रांसफर पर इसका सीधा असर नहीं होगा। सरकार और भुगतान क्षेत्र से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, P2P भुगतान UPI के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इस श्रेणी को शुल्क से बाहर रखना नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा MDR
नई MDR व्यवस्था में शुल्क का भुगतान व्यापारी पक्ष की ओर से भुगतान व्यवस्था के संबंधित पक्षों को किया जाएगा। सरकार ने कहा है कि इसका बोझ सीधे UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा। यानी ग्राहक किसी व्यापारी को ₹2,000 से अधिक का भुगतान करते समय अलग से MDR नहीं देगा। बैंकों को भी यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि व्यापारी इस शुल्क को ग्राहकों पर न डालें। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा था कि MDR कोई टैक्स या सेस नहीं है। उनके अनुसार, यह भुगतान प्रणाली से जुड़े सेवा प्रदाताओं के बीच लिया जाने वाला शुल्क है और इसकी राशि भारत की संचित निधि में जमा नहीं होगी।
अब सरकार के जवाब पर टिकी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल MDR व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया है और केंद्र, RBI तथा अन्य पक्षों को चार सप्ताह का समय दिया है। अब संबंधित पक्षों के जवाब दाखिल होने के बाद अदालत इस मामले के कानूनी और नीतिगत पहलुओं पर आगे विचार करेगी। सुनवाई में कोर्ट की ओर से शुल्क की प्रकृति, इससे होने वाले लाभ और इसमें किसी कर संबंधी तत्व की मौजूदगी जैसे सवाल उठाए गए हैं। वहीं सरकार ने व्यवस्था को सीमित दायरे वाला बताते हुए कहा है कि अधिकांश UPI उपयोगकर्ता इससे प्रभावित नहीं होंगे। मामले की अगली सुनवाई में इन दलीलों और जवाबी हलफनामों के आधार पर आगे की दिशा तय होगी।