कोलकाता: पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सत्ता संभालते ही राज्य के बेरोजगार युवाओं के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने घोषणा की है कि अब सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन की अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष की बढ़ोतरी की जाएगी। यानी, जो सामान्य उम्मीदवार पहले 40 वर्ष तक आवेदन कर सकते थे, वे अब 45 वर्ष की उम्र तक परीक्षा दे सकेंगे। वहीं आरक्षित वर्ग के लिए यह सीमा 50 वर्ष हो जाएगी।
'जो नुकसान होना था, वो हो चुका'
भले ही सरकार के इस फैसले से खुशी की लहर है, लेकिन धरातल पर कई उम्मीदवार इसे 'देर से लिया गया फैसला' बता रहे हैं। हुगली के उत्तरपाड़ा के रहने वाले 39 वर्षीय अचिंत्य मल्लिक का दर्द इसका उदाहरण है। साल 2016 की ग्रुप सी-डी भर्ती प्रक्रिया रद्द होने के बाद से वे बेरोजगार हैं और फिलहाल एक किराने की दुकान में काम कर रहे हैं। अचिंत्य का कहना है, "हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से योग्य घोषित होने के बावजूद पिछली सरकार ने हमें बहाल नहीं किया। अब नई उम्र सीमा से ज्यादा जरूरी हमारी पुरानी नौकरी पर बहाली है।"
ग्रुप सी-डी मंच की मांग: 'परीक्षा नहीं, बहाली चाहिए'
ग्रुप सी-डी एकता मंच के अमित मंडल ने स्पष्ट किया कि जो उम्मीदवार पहले ही योग्य साबित हो चुके हैं, वे दोबारा परीक्षा देने के पक्ष में नहीं हैं। उनकी मांग है कि 7 साल तक सेवा देने वाले कर्मियों को सीधे उनके पदों पर वापस लिया जाए।
घरेलू जिम्मेदारियां और पढ़ाई का छूटा अभ्यास
मेदिनीपुर की 42 वर्षीय शर्बरी मंडल कहती हैं कि उम्र सीमा बढ़ने से एक उम्मीद तो जगी है, लेकिन क्या 40 की उम्र पार कर चुके लोग दोबारा वैसी तैयारी कर पाएंगे? उन्होंने बताया, "संसार और बच्चों की जिम्मेदारी के बीच 9-10 घंटे पढ़ाई करना चुनौतीपूर्ण है। सालों से भर्ती का इंतजार करते-करते पढ़ाई का अभ्यास भी छूट चुका है।"कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम उन युवाओं के लिए संजीवनी हो सकता है जिनकी उम्र सीमा हाल ही में समाप्त हुई थी, लेकिन लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे "योग्य" उम्मीदवारों के लिए असली खुशी तभी आएगी जब उन्हें उनका खोया हुआ पद वापस मिलेगा।