नई दिल्ली. देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है और अब इसका प्रभाव बड़े भौगोलिक क्षेत्र में दिखाई देने लगा है। केरल से शुरुआत करने के बाद मानसून कर्नाटक, गोवा, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश राज्यों तक पहुंच चुका है। असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले दो से तीन दिनों में ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के बड़े हिस्सों में भी मानसून सक्रिय हो सकता है। वहीं आर्थिक राजधानी मुंबई में भी अगले 48 घंटों के भीतर मानसून के दस्तक देने की संभावना जताई जा रही है, जिससे लंबे इंतजार के बाद लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है।
उत्तर भारत को अभी करना होगा इंतजार
हालांकि मानसून ने देश के कई हिस्सों को कवर कर लिया है, लेकिन उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कुछ राज्यों को अभी कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है। दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार, झारखंड और उत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में मानसून के जुलाई के शुरुआती दिनों तक पहुंचने का अनुमान है। इस दौरान इन क्षेत्रों में प्री-मानसून गतिविधियां देखने को मिलेंगी, जिनमें तेज हवाएं, धूलभरी आंधियां और छिटपुट बारिश शामिल है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इन गतिविधियों से तापमान में अस्थायी गिरावट तो आएगी, लेकिन उमस और गर्मी पूरी तरह समाप्त नहीं होगी।
पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में भारी बारिश का खतरा
10 जून को पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के कई जिलों में मूसलाधार बारिश हो सकती है, जिससे जलभराव और भूस्खलन जैसी समस्याएं उत्पन्न होने का खतरा है। इसके अलावा बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी गरज-चमक के साथ तेज बारिश का पूर्वानुमान है। इन राज्यों में किसानों और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी गई है क्योंकि कई स्थानों पर तेज हवाओं के साथ बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं।
11 जून को बदलेगा उत्तर भारत का मौसम
मौसम विभाग के अनुसार 11 जून उत्तर भारत के लिए महत्वपूर्ण दिन साबित हो सकता है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में तेज हवाओं के साथ मौसम अचानक बदलने की संभावना है। कई क्षेत्रों में 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जबकि गरज-चमक के साथ बारिश भी दर्ज की जा सकती है। इससे दिन के तापमान में गिरावट आएगी, लेकिन कुछ इलाकों में धूलभरी आंधी जनजीवन को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों ने लोगों को खुले क्षेत्रों में सावधानी बरतने और मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है।
पहाड़ी राज्यों में ओलावृष्टि और भूस्खलन का खतरा
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में अगले कुछ दिनों के दौरान मौसम अधिक चुनौतीपूर्ण रह सकता है। यहां तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की गई है। ऊंचाई वाले इलाकों में भूस्खलन और सड़क अवरोध जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। चारधाम यात्रा और अन्य धार्मिक यात्राओं पर निकले श्रद्धालुओं को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने भी संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।
मध्य और पश्चिम भारत में जारी रहेगा आंधी-बौछारों का दौर
12 से 14 जून के बीच हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, पश्चिमी राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में रुक-रुक कर धूलभरी आंधियां और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। मध्य प्रदेश के कई जिलों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक दर्ज की जा सकती है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्री-मानसून गतिविधियां मानसून के आगे बढ़ने के संकेत हैं, जो आने वाले दिनों में और मजबूत हो सकती हैं। किसानों के लिए यह मौसम राहत और चुनौती दोनों लेकर आएगा क्योंकि कुछ क्षेत्रों में फसलों को लाभ मिलेगा तो कहीं तेज हवाएं नुकसान भी पहुंचा सकती हैं।
हीटवेव से अभी पूरी राहत नहीं
बारिश और आंधी-तूफान के बीच देश के कुछ हिस्सों में गर्मी का प्रकोप अभी भी जारी रहेगा। भारतीय मौसम विभाग ने दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, विदर्भ क्षेत्र, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा तथा कोंकण-गोवा के कुछ हिस्सों में अगले दो दिनों तक हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। कई शहरों में तापमान सामान्य से ऊपर बना रह सकता है। विशेषज्ञों ने लोगों को पर्याप्त पानी पीने, दोपहर के समय धूप से बचने और बुजुर्गों व बच्चों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है।
अगले सात दिन क्यों हैं महत्वपूर्ण?
मौसम विभाग का मानना है कि अगले सात दिन देश के मौसम परिदृश्य के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं। जहां एक ओर मानसून का विस्तार तेजी से होगा, वहीं दूसरी ओर कई राज्यों में आंधी, बिजली, भारी बारिश और लू जैसी चरम मौसमी घटनाएं एक साथ देखने को मिल सकती हैं। ऐसे में आम नागरिकों, किसानों, यात्रियों और प्रशासन सभी को मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर लगातार नजर बनाए रखने की आवश्यकता होगी।