सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट से जुड़े फर्जीवाड़े का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। शुरुआती जांच में जहां करीब 7.40 करोड़ रुपये के नकली नोट मिलने की बात सामने आई थी, वहीं आगे की पड़ताल में संदिग्ध नकली करेंसी की रकम बढ़कर करीब 17 करोड़ रुपये तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। करेंसी की जांच और मिलान का काम अभी जारी है, इसलिए अंतिम आंकड़ा इससे अलग भी हो सकता है।
ऑडिट के दौरान सामने आया पूरा मामला
मामला सहारनपुर के घंटाघर स्थित सोफिया मार्केट शाखा की करेंसी चेस्ट से जुड़ा है। अगस्त में ऑडिट और नकदी के मिलान के दौरान बड़ी गड़बड़ी का पता चला। जांच में बड़ी संख्या में ऐसे नोट मिले, जिन्हें नकली बताया गया है। इससे पहले बैंक से आरबीआई भेजी गई नकदी में करीब 4.36 लाख रुपये की कमी भी सामने आई थी। इसी विसंगति के बाद मामले की गहराई से जांच शुरू हुई।
असली नोट निकालकर नकली रखने की आशंका
जांच एजेंसियों को आशंका है कि करेंसी चेस्ट में नकली नोट जमा कराकर उनके बदले असली नोट बाहर निकाले गए। अब पुलिस और बैंक की जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि नकली नोट चेस्ट तक कैसे पहुंचे, असली रकम कहां गई और इस पूरे घटनाक्रम में किन लोगों की भूमिका रही। CCTV फुटेज, बैंक रिकॉर्ड और करेंसी से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
तीन बैंक मैनेजरों पर कार्रवाई
मामले की शुरुआती जांच में करेंसी चेस्ट से जुड़े तीन बैंक अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में आई है। इसके बाद PNB प्रबंधन ने वरिष्ठ प्रबंधक रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट प्रबंधक सुशील शर्मा और खेरा बाजार-जगाधरी करेंसी चेस्ट के प्रबंधक अमित कुमार को निलंबित कर दिया है। अधिकारियों से इस संबंध में जवाब भी मांगा गया था, जिसे जांच में संतोषजनक नहीं माना गया।
गड्डियां लगाने वाले कर्मचारी पर भी कार्रवाई
करेंसी चेस्ट में नोटों की गड्डियां व्यवस्थित करने वाले पार्ट-टाइम हाउसकीपर को भी हटा दिया गया है। पुलिस ने बैंक अधिकारियों की शिकायत के आधार पर मामले में कार्रवाई शुरू की है। अब जांच का फोकस इस बात पर है कि करेंसी चेस्ट में नकली नोटों की इतनी बड़ी मात्रा किस तरीके से पहुंची और इसके पीछे किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका तो नहीं थी।
SIT करेगी पूरे मामले की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) गठित कर जांच शुरू कर दी है। बैंक मुख्यालय की टीम भी अपने स्तर पर पड़ताल कर रही है। जांच में करेंसी की गिनती, नोटों का सत्यापन, CCTV फुटेज, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को खंगाला जा रहा है।
कई सवालों के जवाब तलाश रही जांच एजेंसियां
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि करेंसी चेस्ट जैसी सुरक्षित जगह पर इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट कैसे पहुंच गए। असली नोटों को निकालने की प्रक्रिया किस स्तर पर हुई और इसमें बैंक के अंदर से किसकी मदद मिली—इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही इस पूरे फर्जीवाड़े की वास्तविक रकम और जिम्मेदार लोगों की तस्वीर साफ हो सकेगी।