वाराणसी: उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने वाराणसी में भी निगरानी बढ़ा दी है। हालांकि, जिले में फिलहाल स्वाइन फ्लू का कोई पुष्ट मरीज सामने नहीं आया है। इसके बावजूद सरकारी अस्पतालों की बाह्य रोगी विभाग की सेवाओं में बुखार और बदन दर्द की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। संक्रमण की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जांच, निगरानी और इलाज की व्यवस्था को मजबूत किया है।
कोरोना की तर्ज पर होगी स्वाइन फ्लू की निगरानी
स्वास्थ्य विभाग ने स्वाइन फ्लू की निगरानी के लिए कोरोना महामारी के दौरान अपनाए गए प्रोटोकॉल जैसी व्यवस्था तैयार की है। यदि किसी मरीज की आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो उसके संपर्क में आए लोगों की भी जांच की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की टीम मरीज की हाल की यात्रा का पूरा विवरण जुटाएगी। ट्रैवल हिस्ट्री के जरिए संक्रमण के संभावित स्रोत का पता लगाने की कोशिश होगी। मरीज के परिवार और करीबी संपर्कों की जानकारी भी स्वास्थ्य टीम जुटाएगी। जरूरत पड़ने पर संपर्क में आए लोगों के नमूने भी लिए जा सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य संक्रमण को शुरुआती स्तर पर पहचानना और उसे फैलने से रोकना है।
एक सप्ताह में 500 से अधिक मरीज पहुंचे अस्पताल
वाराणसी के सरकारी अस्पतालों में पिछले एक सप्ताह के दौरान बुखार और बदन दर्द की शिकायत वाले 500 से अधिक मरीज पहुंचे हैं। बढ़ती संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में निगरानी बढ़ा दी है। डॉक्टरों के अनुसार, हर बुखार को स्वाइन फ्लू नहीं माना जा सकता, लेकिन लक्षणों को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। तेज बुखार के साथ शरीर में दर्द और कमजोरी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की गई है। लगातार सूखी खांसी, गले में खराश और नाक बहना भी संभावित लक्षण हो सकते हैं। मरीजों को खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लेने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों में आने वाले संदिग्ध मामलों पर लगातार नजर रख रहा है।
पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आए लोगों की भी होगी जांच
स्वाइन फ्लू की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर मरीज का पूरा विवरण स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। इसमें मरीज की पहचान से जुड़ी जानकारी के साथ उसकी हाल की यात्रा का विवरण भी शामिल किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की टीम मरीज के संपर्क में आए लोगों की सूची तैयार करेगी। परिवार के सदस्यों और करीबी संपर्कों में संक्रमण के लक्षणों की जानकारी ली जाएगी। जरूरत पड़ने पर संपर्क में आए लोगों के नमूने जांच के लिए भेजे जाएंगे। स्वास्थ्यकर्मी परिवार को संक्रमण से बचाव के जरूरी उपायों की जानकारी भी देंगे। इस निगरानी व्यवस्था से संक्रमण की कड़ी को समय रहते पहचानने में मदद मिलेगी।
सरकारी अस्पतालों में निशुल्क होगी जांच
डॉक्टर की सलाह के बाद निर्धारित सरकारी अस्पतालों में स्वाइन फ्लू की जांच के लिए नमूने निशुल्क लिए जाएंगे। दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल और मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में सैंपल लेने की व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा बीएचयू सर सुंदरलाल अस्पताल में भी जांच की सुविधा उपलब्ध होगी। शास्त्री अस्पताल रामनगर और स्वामी विवेकानंद अस्पताल भेलूपुर में भी निशुल्क सैंपल लिए जाएंगे। लिए गए नमूनों को जांच के लिए आईएमएस बीएचयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग भेजा जाएगा। आरटीपीसीआर जांच के बाद रिपोर्ट के आधार पर मरीज के इलाज की आगे की प्रक्रिया तय होगी। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है।
स्वास्थ्य मंत्री ने निगरानी बढ़ाने के दिए निर्देश
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने शनिवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों के साथ समीक्षा की। बैठक में स्वाइन फ्लू की स्थिति और इससे निपटने की तैयारियों पर चर्चा की गई। स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पतालों में जरूरी व्यवस्थाएं मजबूत रखने के निर्देश दिए। संदिग्ध मरीजों की पहचान और जांच प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को लगातार निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए। इसके बाद वाराणसी में भी स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ाते हुए निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया है। अधिकारियों को संभावित मामलों की जानकारी तुरंत जुटाने और आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।
स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण
स्वाइन फ्लू में तेज बुखार के साथ ठंड लगना या कंपकंपी हो सकती है। मरीज को लगातार सूखी खांसी और गले में खराश की शिकायत हो सकती है। शरीर और मांसपेशियों में तेज दर्द भी इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल है। कुछ मरीजों को सिरदर्द और अत्यधिक थकान महसूस हो सकती है। कमजोरी के साथ नाक बहना या नाक बंद होने की समस्या भी हो सकती है। इनमें से कई लक्षण सामान्य मौसमी वायरल संक्रमण में भी दिखाई दे सकते हैं। इसलिए लक्षण दिखने पर घबराने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह से संक्रमण की पहचान और उपचार में मदद मिल सकती है।