कोलकाता के चर्चित 1993 बम धमाका मामले में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले के दोषी मोहम्मद राशिद खान की समयपूर्व रिहाई पर रोक लगाते हुए उसे नोटिस जारी किया है। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दिए जाने के बाद शीर्ष अदालत ने यह कदम उठाया।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब
जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस संजीव सचदेवा की अवकाशकालीन पीठ ने राशिद खान को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत फिलहाल यह जांच करेगी कि दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा दी गई राहत उचित थी या नहीं।
रिहाई के आदेश पर उठे सवाल
दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में राशिद खान की लंबी कैद, जेल में उसके आचरण और सुधारवादी न्याय सिद्धांत को आधार बनाकर रिहाई का आदेश दिया था। हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि ऐसे गंभीर आतंकवादी अपराध में दोषी व्यक्ति को राहत देना न्याय के हित में नहीं होगा।
बंगाल सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि सेंटेंस रिव्यू बोर्ड ने पहले ही राशिद खान की समयपूर्व रिहाई के खिलाफ राय दी थी। इसके बावजूद हाई कोर्ट ने राहत प्रदान की। सरकार का तर्क है कि इस हमले में दर्जनों लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग प्रभावित हुए थे, इसलिए मामले की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
1993 ब्लास्ट का मुख्य आरोपी
अदालत में यह भी कहा गया कि राशिद खान इस साजिश का प्रमुख सूत्रधार माना गया था। मार्च 1993 में कोलकाता के व्यस्त इलाके में हुए धमाकों ने पूरे देश को झकझोर दिया था। जांच के बाद उसे TADA कानून के तहत दोषी ठहराया गया था।
उम्र और स्वास्थ्य का हवाला
राशिद खान की ओर से दलील दी गई कि वह 77 वर्ष का हो चुका है और तीन दशक से अधिक समय जेल में बिता चुका है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि मामले के एक अन्य दोषी को वर्षों पहले रिहा किया जा चुका है, इसलिए समान आधार पर उसे भी राहत मिलनी चाहिए।
आगे क्या होगा?
अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की विस्तृत सुनवाई होगी। शीर्ष अदालत के अंतिम निर्णय से यह तय होगा कि राशिद खान को समयपूर्व रिहाई मिलेगी या उसे शेष सजा जेल में ही काटनी होगी।