कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में करारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर इस वक्त भारी घमासान मचा हुआ है। पार्टी इस समय 'असली टीएमसी', 'नकली टीएमसी', 'ममता समर्थक' और 'ऋतब्रत समर्थक' जैसे कई गुटों में बंट चुकी है। इस राजनीतिक भूचाल और तीखी गुटबाजी के बीच 'कालीघाट खेमे' के सिपहसालार और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने फिर से विदेश जाने की तैयारी शुरू कर दी है।
आंख के पुराने इलाज के सिलसिले में विदेश जाने की अनुमति के लिए मंगलवार को अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया। उनके वकील ने न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की अपील की है। संभावना है कि इस याचिका पर बुधवार को सुनवाई हो सकती है।
चुनावी बयानों के चलते लगी थी कोर्ट की रोक
साल 2026 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कुछ कथित भड़काऊ बयान देने के आरोप में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट में एक मामला दर्ज हुआ था। उस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उन पर कड़ा प्रतिबंध लगाते हुए निर्देश दिया था कि वह अदालत की लिखित अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जा सकते। इसी कानूनी बंदिश के कारण डायमंड हार्बर के सांसद को अब हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है। वह करीब एक सप्ताह के लिए देश से बाहर जाना चाहते हैं।
सिंगूर हादसे से जुड़ी है आंख की समस्या
अभिषेक बनर्जी की आंख की यह समस्या काफी पुरानी है। कुछ साल पहले मुर्शिदाबाद में पार्टी का एक कार्यक्रम खत्म कर कोलकाता लौटते समय सिंगूर के पास उनकी गाड़ी का भीषण एक्सीडेंट हो गया था। उस हादसे में अभिषेक की बाईं आंख के नीचे की हड्डी टूट गई थी और आंख की पुतली को गंभीर नुकसान पहुंचा था। कोलकाता और दिल्ली के एम्स (AIIMS) में ऑपरेशन के बाद भी जटिलता कम नहीं हुई, जिसके बाद कोर्ट की विशेष अनुमति लेकर उन्होंने दुबई और अमेरिका के जॉन हॉपकिंस अस्पताल में लंबा इलाज कराया था। इसी इलाज के फॉलो-अप के लिए वे फिर से अमेरिका जाना चाहते हैं।
जांच एजेंसियों का कड़ा पहरा और सुप्रीम कोर्ट का पुराना आदेश
चुनावों में हार के बाद से ही अभिषेक बनर्जी सीआईडी, लोकल पुलिस, ईडी और सीबीआई जैसी तमाम जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। कोयला तस्करी से लेकर शिक्षक भर्ती घोटाले जैसे कई मामलों में उनसे मैराथन पूछताछ हो चुकी है।
करीब तीन साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजीरा बनर्जी को विदेश जाने से कम से कम एक हफ्ते पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) को लिखित सूचना देनी होगी। उस समय अभिषेक ने ईडी को पत्र लिखा था, लेकिन जब जांच एजेंसी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया, तो सुप्रीम कोर्ट की विशेष अनुमति पर ही वे विदेश जा सके थे। अब देखना यह होगा कि बंगाल के बदले राजनीतिक परिदृश्य और हाई कोर्ट की बंदिशों के बीच अभिषेक बनर्जी को विदेश जाने का ग्रीन सिग्नल मिलता है या नहीं।