कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। उनके एक विवादित चुनावी बयान को लेकर बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय के साइबर क्राइम थाने में एक नई एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला उनके उस कथित बयान से जुड़ा है जिसमें उन्होंने कहा था,"अगर मैं जिंदा रहा तो 31 तारीख को सूद समेत लौटाऊंगा।" पुलिस अब इस बयान की कानूनी और आपराधिक पहलुओं से जांच कर रही है। यह मामला पहले से दर्ज अन्य चुनावी भाषणों से जुड़े मामलों के क्रम में एक नया घटनाक्रम माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार,अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कई जनसभाओं में विपक्ष पर तीखे हमले किए थे। इन्हीं भाषणों में उनका एक बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि "अगर मैं जिंदा रहा तो 31 तारीख को सूद समेत लौटाऊंगा।" शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस तरह का बयान राजनीतिक माहौल को भड़काने वाला और तनाव बढ़ाने वाला हो सकता है। इसी आधार पर बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ एक नई एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अब भाषण के वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
पहले भी दर्ज हो चुका है मामला
यह अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दर्ज पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए उनके कई भाषणों को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी। सामाजिक कार्यकर्ता राजीव सरकार ने आरोप लगाया था कि अभिषेक ने अपने भाषणों में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जो भड़काऊ, धमकी भरे और सार्वजनिक शांति को प्रभावित करने वाले थे। उसी शिकायत के आधार पर बिधाननगर उत्तर साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। उस मामले में भारतीय न्याय संहिता और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत जांच शुरू हुई थी।
डीजे टिप्पणी मामले से भी जुड़े हैं अभिषेक
इसी चुनावी अभियान के दौरान अभिषेक बनर्जी की "डीजे" टिप्पणी** भी विवादों में रही थी। उस मामले में सीआईडी ने अदालत की अनुमति लेकर उनका वॉयस सैंपल भी लिया था। हाल ही में वह कड़ी सुरक्षा के बीच बिधाननगर अदालत पहुंचे थे, जहां जांच अधिकारियों की मौजूदगी में उनकी आवाज का नमूना रिकॉर्ड किया गया। अब इस नई एफआईआर के सामने आने के बाद चुनावी भाषणों से जुड़े मामलों की जांच और तेज होने की संभावना है।
पुलिस की जांच किस दिशा में?
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित बयान से किसी प्रकार की हिंसा भड़काने, सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने या राजनीतिक तनाव बढ़ाने की आशंका थी या नहीं। जांच एजेंसियां भाषण के पूरे संदर्भ, वीडियो रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पर उसके प्रसार की भी जांच कर रही हैं। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सभी तथ्यों को इकट्ठा किया जा रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस मामले को लेकर राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। भाजपा का कहना है कि चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए भड़काऊ बयानों पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं तृणमूल कांग्रेस पहले भी ऐसे मामलों को राजनीतिक प्रतिशोध बता चुकी है और आरोप लगाया है कि केवल विपक्षी नेताओं के खिलाफ चुनिंदा कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल इस नई एफआईआर पर अभिषेक बनर्जी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।