कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस में जारी सियासी घमासान अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। ऋतव्रत बंद्योपाध्याय गुट ने खुद को “असली तृणमूल” बताते हुए चुनाव आयोग से मुलाकात के लिए समय मांगा है। गुट का कहना है कि अनुमति मिलते ही उनका प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर अपना पक्ष रखेगा।
आयोग के सामने पेश करेंगे संगठन और संख्या बल का दावा
ऋतव्रत खेमे का दावा है कि उनके पास न केवल विधायकों और जनप्रतिनिधियों का पर्याप्त समर्थन है, बल्कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे पर भी उनका प्रभाव है। इसी आधार पर वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के सामने अपना दावा पेश करेंगे और पार्टी पर अपने अधिकार को साबित करने की कोशिश करेंगे।
अगले सप्ताह दिल्ली जा सकता है 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल
सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग से समय मिलने पर अगले सप्ताह 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाएगा। प्रतिनिधि दस्तावेजों, कार्यसमिति की सूची और अन्य रिकॉर्ड के जरिए आयोग को यह बताने का प्रयास करेंगे कि पार्टी की वास्तविक कमान उनके हाथ में है।
सीईओ कार्यालय में जमा किए गए अहम दस्तावेज
मंगलवार को ऋतव्रत गुट के कई विधायक कोलकाता स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने नई राष्ट्रीय कार्यसमिति के 30 सदस्यों की सूची और सोमवार को हुई बैठक का कार्यवृत्त जमा किया। इसके बाद ऋतव्रत बंद्योपाध्याय ने कहा कि वे कोई ज्ञापन देने नहीं आए थे, बल्कि कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज जमा किए हैं जिन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
ममता बनर्जी ने भी आयोग को भेजी कार्यसमिति की सूची
इस बीच ममता बनर्जी ने खुद को तृणमूल कांग्रेस की चेयरपर्सन बताते हुए राष्ट्रीय कार्यसमिति की सूची चुनाव आयोग को सौंप दी है। इस सूची में अभिषेक बनर्जी को अखिल भारतीय महासचिव के रूप में बरकरार रखा गया है। ममता खेमे की इस पहल के बाद राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं।
दोनों गुटों के बीच बढ़ी तृणमूल पर दावे की लड़ाई
गौरतलब है कि हाल के दिनों में तृणमूल की राष्ट्रीय कार्यसमिति में कई बदलाव हुए हैं। कुछ नेताओं के विद्रोही खेमे में शामिल होने के बाद पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर विवाद गहरा गया है। इसी के बीच ऋतव्रत गुट ने विशेष अधिवेशन बुलाकर अरूप राय को चेयरमैन घोषित किया और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का ऐलान किया।