कोलकाता: अदालत में बार-बार गैरहाजिर रहने और मामलों के शीघ्र निपटारे में रुचि नहीं दिखाने वाले सरकारी पैनल के वकीलों को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
मामलों की सुनवाई में हो रही देरी पर नाराजगी
सुनवाई के दौरान न्यायालय के संज्ञान में आया कि राज्य सरकार के पैनल में शामिल कुछ अधिवक्ता निर्धारित समय पर अदालत में उपस्थित नहीं हो रहे हैं। एक मामले में कई बार पुकारे जाने के बावजूद संबंधित वकीलों की ओर से कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिससे मामले के निपटारे में अनावश्यक देरी हुई।
अतिरिक्त लोक अभियोजक भी नहीं दे सके जानकारी
अदालत ने पाया कि संबंधित मामले में अतिरिक्त लोक अभियोजक भी यह बताने में असमर्थ रहे कि पैनल के अधिवक्ता कहां हैं। इस स्थिति पर न्यायालय ने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के प्रति ऐसी उदासीनता स्वीकार्य नहीं है।
नियुक्ति के मानदंडों पर मांगा जवाब
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने पूछा कि राज्य सरकार के पैनल में अधिवक्ताओं की नियुक्ति आखिर किन मानदंडों के आधार पर की गई है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि नियुक्ति के समय उनकी पेशेवर क्षमता और अदालत में उपस्थिति के रिकॉर्ड का मूल्यांकन किया गया था या नहीं।
लीगल रिमेम्ब्रांसर को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने राज्य के लीगल रिमेम्ब्रांसर को पूरी प्रक्रिया की जानकारी सहित विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर पैनल अधिवक्ताओं की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जा सकती है।