कोलकाता: जादवपुर विश्वविद्यालय में ऐतिहासिक फलक तोड़े जाने की घटना को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ABVP ने घटना की निंदा करते हुए विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक प्रतीकों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।
फलक तोड़े जाने को लेकर ABVP का गंभीर आरोप
ABVP दक्षिण बंगाल का आरोप है कि विश्वविद्यालय की संस्कृति, परंपरा और भारतीय चेतना से जुड़े प्रतीकों को निशाना बनाने की यह घटना किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकती है। संगठन ने इसके पीछे अति-वामपंथी और नक्सली विचारधारा से जुड़े तत्वों की भूमिका होने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कमल के प्रतीक को लेकर भी उठाया सवाल
ABVP के मुताबिक, संबंधित फलक पर बना कमल का फूल भारतीय और सनातनी सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है। संगठन का दावा है कि ऐसे प्रतीकों को लेकर अति-वामपंथी समूहों में लंबे समय से विरोध का भाव रहा है और इसी वजह से फलक को नुकसान पहुंचाने की घटना को गंभीरता से जांचे जाने की जरूरत है।
नीलकंठ भट्टाचार्य ने क्या कहा?
ABVP के प्रदेश सचिव नीलकंठ भट्टाचार्य ने कहा कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है। उनके अनुसार, जादवपुर विश्वविद्यालय में भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े प्रतीकों को बार-बार विवाद में लाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे विश्वविद्यालय के मूल गौरव और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की।
ABVP ने रखीं पांच प्रमुख मांगें
ABVP ने विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के सामने कई मांगें रखी हैं। संगठन ने कहा है कि फलक तोड़े जाने की घटना की तत्काल निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही विश्वविद्यालय परिसर के CCTV फुटेज को सुरक्षित रखते हुए जांच में शामिल करने की मांग की गई है।
संगठन ने तोड़फोड़ में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने, विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक धरोहरों और प्रतीकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा राजनीतिक पहचान से ऊपर उठकर विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
‘राजनीतिक विचारधारा की प्रयोगशाला नहीं है विश्वविद्यालय’
ABVP ने कहा कि जादवपुर विश्वविद्यालय किसी राजनीतिक विचारधारा की प्रयोगशाला नहीं, बल्कि देश का एक ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान है। संगठन ने कहा कि विश्वविद्यालय की संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत और गौरव की रक्षा के लिए वह आगे भी आवाज उठाता रहेगा।