कोलकाता: पश्चिम बंगाल में पत्रकारों के लिए सरकार ने कई अहम घोषणाएं की हैं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पत्रकारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य बीमा, पेंशन और आर्थिक सहायता से जुड़े कई फैसलों का ऐलान किया है।
5 लाख रुपये तक मिलेगा स्वास्थ्य बीमा
नई व्यवस्था के तहत पत्रकारों को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिलेगा। इसका मकसद पत्रकारों और उनके परिवारों को गंभीर बीमारी या महंगे इलाज के दौरान आर्थिक बोझ से राहत देना है।
38 हजार अस्पतालों में इलाज की सुविधा
स्वास्थ्य बीमा का लाभ सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा। इसके तहत देशभर के करीब 38 हजार सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिलने की जानकारी दी गई है। वेल्लोर, मुंबई के टाटा मेमोरियल और चंडीगढ़ पीजीआई जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान भी इस दायरे में शामिल बताए गए हैं।
परिवार भी स्वास्थ्य बीमा के दायरे में
इस योजना का लाभ पत्रकारों के परिवार को भी मिलेगा। जो पत्रकार पहले से आयुष्मान भारत योजना के तहत अपने परिवार के साथ पंजीकृत हैं, उन्हें अलग से मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का कार्ड बनवाने की जरूरत नहीं होगी।
सेवानिवृत्त पत्रकारों की पेंशन हुई दोगुनी
सरकार ने रिटायर्ड पत्रकारों के लिए भी बड़ी राहत दी है। उनकी मासिक पेंशन को 2,500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दिया गया है। यानी अब पात्र सेवानिवृत्त पत्रकारों को पहले के मुकाबले दोगुनी पेंशन मिलेगी। यह व्यवस्था 1 सितंबर 2026 से लागू होने की बात कही गई है।
एक्रिडिटेशन कार्ड नहीं होने पर भी मिलेगा लाभ
पेंशन के मामले में एक और अहम बदलाव किया गया है। अब सिर्फ एक्रिडिटेशन कार्ड वाले पत्रकार ही नहीं, बल्कि पात्र ऐसे सेवानिवृत्त पत्रकार भी आवेदन कर सकेंगे, जिनके पास एक्रिडिटेशन कार्ड नहीं है।
न्यूज डेस्क पर काम करने वाले पत्रकार भी शामिल
सरकार ने न्यूज डेस्क पर काम करने वाले पत्रकारों को भी इस सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में शामिल करने की बात कही है। इससे रिपोर्टिंग के साथ-साथ न्यूजरूम और संपादकीय डेस्क से जुड़े पत्रकारों को भी योजनाओं का लाभ मिलने का रास्ता साफ होगा।
दुर्गापूजा से पहले 3 हजार रुपये की सहायता
पत्रकारों के लिए दुर्गापूजा से पहले आर्थिक मदद का भी ऐलान किया गया है। घोषणा के मुताबिक, कर्मरत पत्रकारों को 3,000 रुपये की सहायता दी जाएगी। इस सुविधा के लिए भी एक्रिडिटेशन कार्ड को अनिवार्य नहीं रखने की बात कही गई है।
पत्रकारों की सामाजिक सुरक्षा पर जोर
सरकार का कहना है कि निजी मीडिया संस्थानों में काम करने वाले कई पत्रकारों को नौकरी के बाद पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल पाती। ऐसे में पेंशन बढ़ाने और स्वास्थ्य बीमा का दायरा बढ़ाने के फैसले को पत्रकारों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।