कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। पूर्वमुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर अत्याचार किए जाने का आरोप लगाया है। वहीं, उनके आरोपों पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने पलटवार किया है। उन्होंने तृणमूल के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इसे पार्टी के आंतरिक विवाद से जोड़कर देखा है।
ममता बनर्जी ने लगाए अत्याचार के आरोप
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि राज्य में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर अत्याचार किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी कार्यकर्ताओं पर राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है। इसके अलावा कई जगहों पर पार्टी कार्यालयों पर कब्जा, कार्यकर्ताओं को परेशान करने और पुलिस के दबाव जैसे आरोप भी उन्होंने लगाए।
लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर भी उठाए सवाल
तृणमूल सुप्रीमो ने लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करने की स्वतंत्रता को लेकर भी सवाल खड़े किए। ममता बनर्जी का कहना है कि राजनीतिक गतिविधियों को लेकर कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाया जा रहा है। उनके इन आरोपों के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है।
शमीक भट्टाचार्य ने ममता के आरोपों पर किया पलटवार
ममता बनर्जी के आरोपों पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस जिस तरह की स्थिति का आरोप लगा रही है, उसका मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से मेल नहीं है। उन्होंने पिछले सरकार के कार्यकाल के दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ हुई कथित घटनाओं का भी जिक्र किया।
बीजेपी कार्यकर्ताओं के घर से बाहर रहने का किया दावा
समिक भट्टाचार्य ने दावा किया कि पिछली सरकार के दौरान चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की जीत के बाद कई बीजेपी कार्यकर्ताओं को अपने घरों से बाहर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा था। उन्होंने महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं के साथ गंभीर दुर्व्यवहार के आरोप भी लगाए। इसके अलावा बीजेपी समर्थकों की दुकानों में लूटपाट और तोड़फोड़ किए जाने का भी दावा किया।
‘बीजेपी के सत्ता में आने के बाद ऐसी घटनाएं नहीं हुईं’
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि उनकी पार्टी के सत्ता में आने के बाद राज्य में इस तरह की घटनाएं नहीं हुई हैं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे अत्याचार के आरोपों को आधारहीन बताया। शमीक भट्टाचार्य के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे राजनीतिक मतभेद और आंतरिक विवादों के कारण इस तरह के आरोप सामने आ रहे हैं।
जादवपुर का नाम बदलने पर शरवरी मुखर्जी के बयान पर भी बोले शमीक
इस बीच जादवपुर का नाम बदलने को लेकर बीजेपी विधायक शरवरी मुखर्जी के बयान का मुद्दा भी सामने आया। इस पर शमीक भट्टाचार्य ने कहा कि शरवरी मुखर्जी ने यह बात भावनात्मक रूप से कही है। उन्होंने यह भी कहा कि जादवपुर का संबंध श्री अरविंद के नाम से जुड़ा हुआ है।
‘जादवपुर का नाम बदलने की मांग विधायक की निजी राय’
समिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि जादवपुर का नाम बदलने को लेकर शरवरी मुखर्जी की टिप्पणी को उनकी व्यक्तिगत राय के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि यह बीजेपी की आधिकारिक स्थिति नहीं है।
मीडिया संस्थानों और अकादमिक परिसरों में भगवा रंग पर बीजेपी का रुख
मीडिया कार्यालयों या अकादमिक संस्थानों को भगवा रंग से रंगे जाने के मुद्दे पर भी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मीडिया कार्यालयों या अकादमिक संस्थानों को भगवा रंग में रंगना बीजेपी का एजेंडा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी का कोई भी नेता या कार्यकर्ता इस तरह की गतिविधि से जुड़ा नहीं है।
‘भगवा भारत की परंपरा से जुड़ा रंग’
समिक भट्टाचार्य ने कहा कि भगवा रंग भारत की परंपरा और संस्कृति से जुड़ा हुआ है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भगवा रंग को विरोध की भाषा के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
आरोप-प्रत्यारोप से फिर गरमाई बंगाल की राजनीति
ममता बनर्जी के अत्याचार के आरोप और बीजेपी के पलटवार के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर तृणमूल कांग्रेस राजनीतिक दबाव और कार्यकर्ताओं के साथ कथित अत्याचार का मुद्दा उठा रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी पिछले दौर की राजनीतिक हिंसा का हवाला देकर तृणमूल के आरोपों पर सवाल खड़े कर रही है। जादवपुर के नाम परिवर्तन और भगवा रंग के मुद्दे ने भी इस राजनीतिक बहस को और चर्चा में ला दिया है।