कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। सीपीआई (एम) नेता मोहम्मद सलीम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनावी प्रक्रिया, चुनाव आयोग और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता को डराकर निष्पक्ष मतदान संभव नहीं है और सबसे पहले मतदाताओं को भयमुक्त वातावरण देना जरूरी है। सलीम ने दावा किया कि राज्य में चुनाव प्रक्रिया के दौरान कई तरह की अनियमितताएं देखने को मिलती हैं।
न्यायपालिका और नौकरशाही पर टिप्पणी
मोहम्मद सलीम ने कहा कि न्यायपालिका से उनका आशय पूरी न्यायिक व्यवस्था से है—निचले स्तर से लेकर उच्चतम स्तर तक। इसी तरह उन्होंने नौकरशाही (IAS, IPS, WBCS सहित) को एक व्यापक प्रशासनिक ढांचा बताया। उन्होंने यह भी कहा कि वे सभी अधिकारियों को दोष नहीं दे रहे, लेकिन व्यवस्था में कुछ “काली भेड़ें” जरूर मौजूद हैं।
चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
सलीम ने चुनाव आयोग (ECI) पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब मतदाता सूची तैयार करने के बजाय इसे “वोटों की गणना और परिणाम प्रभावित करने का माध्यम” बनाया जा रहा है। उनके अनुसार यह प्रक्रिया धर्म, क्षेत्र और बूथ आधारित पैटर्न में बदलती जा रही है, जो चिंता का विषय है।
चुनावी हिंसा और गड़बड़ियों पर टिप्पणी
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों के दौरान अवैध हथियार, बम भंडारण और काले धन के लेन-देन जैसी समस्याएं सामने आती हैं। सलीम ने कहा कि नाका चेकिंग केवल दिखावे के लिए होती है, जबकि बड़े स्तर पर होने वाली गतिविधियों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की जाती।
चुनाव सुधार की मांग
सीपीआई (एम) नेता ने मांग की कि जिन लोगों के खिलाफ पिछले पंचायत, लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मामले दर्ज हैं, उन्हें चुनाव ड्यूटी से हटाया जाए। साथ ही उन्होंने उन अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की जिन्होंने कथित तौर पर सत्ताधारी पक्ष का समर्थन किया।
बच्चों की सुरक्षा पर भी चिंता
सलीम ने यह भी कहा कि चुनावों के बाद कई इलाकों में बम विस्फोट जैसी घटनाओं से बच्चे प्रभावित होते हैं, और इस समस्या पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है।