कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा में मंगलवार को राजनीतिक तापमान उस समय बढ़ गया जब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला। अपने भाषण के दौरान उन्होंने चुनावी नतीजों का जिक्र करते हुए कहा कि जब कोई नेता अपने ही बूथ में हार जाए तो उसे जननेता कैसे माना जा सकता है। इस टिप्पणी के बाद सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया और टीएमसी के बागी विधायक वॉकआउट कर गए।
विधानसभा में ममता पर बरसे सुवेंदु
राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के कई पुराने बयानों को याद दिलाते हुए कहा कि जनता ने चुनाव में उनका जवाब दे दिया है। उन्होंने दावा किया कि बंगाल की जनता ने सरकार की नीतियों और राजनीतिक रवैये पर अपना फैसला सुना दिया है।
बागी टीएमसी गुट ने किया विरोध
सुवेंदु की टिप्पणी के बाद टीएमसी के बागी गुट के विधायक सदन के वेल में पहुंचे और विरोध प्रदर्शन करते हुए वॉकआउट कर गए। माना जा रहा है कि यह गुट हाल के दिनों में पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर सामने आया है और संगठन के भीतर अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है।
ममता समर्थक विधायक सीटों पर डटे रहे
दिलचस्प बात यह रही कि ममता समर्थक टीएमसी विधायक सदन में मौजूद रहे और वॉकआउट में शामिल नहीं हुए। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और राजनीतिक विभाजन की चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
कुणाल घोष ने उठाया नया मुद्दा
विवाद के बीच टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने कुछ नेताओं के खिलाफ लगे आरोपों का मुद्दा उठाया और कार्रवाई की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी के खिलाफ ठोस शिकायत है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों के संकेत
विधानसभा में हुई यह घटना सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के भीतर बढ़ती असहमति और विपक्ष के आक्रामक रुख ने बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा शुरू कर दी है।