कोलकाता: तारातला में गोदाम ढहने की घटना को लेकर पश्चिम बंगाल विधानसभा में गुरुवार को राजनीतिक तापमान बढ़ गया। नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने इस मामले में ‘काली’ नाम के एक शख्स का जिक्र करते हुए गंभीर आरोप लगाए। उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा कि आखिर ‘काली’ कौन हैं और उनका तारातला हादसे से क्या संबंध है।
विधानसभा में सुवेंदु का बड़ा आरोप
विधानसभा में बोलते हुए सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि तारातला में ढहे गोदाम के पीछे ‘काली’ की भूमिका है। उन्होंने कहा कि कोलकाता नगर निगम में काली की मंजूरी के बिना कोई भी भवन योजना पास नहीं होती। हालांकि उन्होंने ‘काली’ का पूरा नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान के बाद चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
कौन हैं कालीचरण बंद्योपाध्याय?
नगर निगम सूत्रों के अनुसार, सुवेंदु अधिकारी का इशारा पूर्व मेयर फिरहाद हाकिम के ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) कालीचरण बंद्योपाध्याय की ओर था। कालीचरण मूल रूप से राज्य सरकार के कर्मचारी हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत पश्चिम बंगाल पुलिस से की थी और बाद में प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए। 2018 में जब शोवन चट्टोपाध्याय ने कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दिया और फिरहाद हाकिम मेयर बने, तभी कालीचरण की नगर निगम में एंट्री हुई। कम समय में ही उन्होंने निगम की कार्यप्रणाली पर मजबूत पकड़ बना ली और मेयर के भरोसेमंद सहयोगी बन गए।
निगम में बढ़ता गया प्रभाव
सूत्रों के मुताबिक, फिरहाद हाकिम के पास मेयर के साथ-साथ कई विभागों की जिम्मेदारी होने के कारण निगम के कई अहम कामकाज कालीचरण के माध्यम से संचालित होने लगे। धीरे-धीरे वे निगम के प्रभावशाली अधिकारियों में शामिल हो गए और प्रशासनिक फैसलों में उनकी भूमिका बढ़ती चली गई।
गोदाम के नक्शे को लेकर उठे सवाल
तारातला हादसे के बाद सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि ढहे हुए गोदाम का नक्शा तकनीकी खामियों से भरा था। विधानसभा में उन्होंने वह दस्तावेज भी दिखाया, जिस पर फिरहाद हाकिम के हस्ताक्षर मौजूद थे। यह नक्शा इसी वर्ष 17 जनवरी को कोलकाता नगर निगम द्वारा मंजूर किया गया था।
तृणमूल पर लगाए गंभीर आरोप
सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यदि कालीचरण से पूछताछ की जाए तो कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बाइपास के पास बन रहे तृणमूल भवन के निर्माण में भी कालीचरण की भूमिका है और नगर निगम से धन का दुरुपयोग किया गया है। हालांकि इन आरोपों पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अभिषेक बनर्जी का भी लिया नाम
विधानसभा में सुवेंदु अधिकारी ने कालीचरण का नाम अभिषेक बनर्जी से भी जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि कालीचरण की नियुक्ति ‘कैमैक स्ट्रीट’ से हुई थी। राजनीतिक हलकों में कैमैक स्ट्रीट को अभिषेक बनर्जी के राजनीतिक कार्यालय का प्रतीक माना जाता है।
पहले भी विवादों में रह चुके हैं कालीचरण
कालीचरण बंद्योपाध्याय का नाम इससे पहले भी विवादों में आ चुका है। सितंबर 2024 में अभिषेक बनर्जी के कार्यालय से जुड़े एक कर्मचारी ने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कालीचरण खुद को अभिषेक का करीबी बताकर व्यवसायियों और ठेकेदारों से आर्थिक लाभ हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि उस समय कोलकाता पुलिस ने मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की थी और शिकायत पर आगे कार्रवाई भी नहीं हुई। वहीं, फिरहाद हाकिम सार्वजनिक रूप से कालीचरण के समर्थन में खड़े नजर आए थे।
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चा
तारातला हादसे के बाद विधानसभा में कालीचरण बंद्योपाध्याय का नाम सामने आने से पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष जहां मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, वहीं अब सभी की नजर इस पर टिकी है कि इन आरोपों को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है।