कोलकाता: तारातला में निर्माणाधीन गोदाम ढहने की घटना के बाद अब इसकी मंजूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सामने आए दस्तावेजों से पता चला है कि कोलकाता नगर निगम (KMC) ने 17 जनवरी 2026 को इस गोदाम परियोजना को आधिकारिक भवन निर्माण अनुमति प्रदान की थी। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा में दावा किया कि इस अनुमति पत्र पर तत्कालीन मेयर फिरहाद हाकिम समेत संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर मौजूद हैं और मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
बेहरा ब्रदर्स के नाम जारी हुआ था बिल्डिंग परमिट
KMC के भवन विभाग द्वारा जारी बिल्डिंग परमिट नंबर 2025090070 के अनुसार, यह अनुमति बेहरा ब्रदर्स (Behera Brothers) के साझेदार शंभूनाथ बेहरा के नाम जारी की गई थी। परियोजना का पता P-2, ट्रांसपोर्ट डिपो रोड, वार्ड नंबर 80, बरो नंबर 9 दर्ज है। आवेदन 8 सितंबर 2025 को जमा किया गया था, जबकि मंजूरी 17 जनवरी 2026 को दी गई।
वेयरहाउस के रूप में मिली थी स्वीकृति
दस्तावेज के अनुसार भवन को Use Group-08 (Storage/Warehouse) श्रेणी के तहत मंजूरी दी गई थी। परियोजना के लिए लगभग 6,889 वर्ग मीटर भूमि, 19.175 मीटर ऊंचाई और 10,559.985 वर्ग मीटर कुल निर्मित क्षेत्र को स्वीकृति मिली थी। गोदाम के उपयोग के लिए कई विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) भी प्राप्त किए गए थे।
आर्किटेक्ट और इंजीनियर के नाम भी दर्ज
अनुमोदित योजना में लाइसेंस प्राप्त वास्तुकार सुप्रतिम चौधरी और इंजीनियरिंग विशेषज्ञ शांतनु दत्ता के नाम दर्ज हैं। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि स्वीकृत डिजाइन और संरचनात्मक गणनाएं सुरक्षा मानकों के अनुरूप थीं या नहीं।
मुख्यमंत्री का हमला, बोले- ‘किसी को नहीं छोड़ा जाएगा’
विधानसभा में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि लगातार दुर्घटनाओं के बावजूद जिम्मेदार लोगों ने कोई सबक नहीं लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के कारण कोलकाता की सुरक्षा से समझौता किया गया और इस मामले में जिम्मेदार सभी व्यक्तियों की भूमिका की जांच होगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हादसे के दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
दस्तावेज क्या साबित करता है और क्या नहीं
उपलब्ध बिल्डिंग परमिट यह साबित करता है कि KMC ने 17 जनवरी 2026 को गोदाम निर्माण की अनुमति दी थी। हालांकि यह दस्तावेज यह नहीं बताता कि भवन का संरचनात्मक डिजाइन सुरक्षित था या नहीं, निर्माण कार्य स्वीकृत नक्शे के अनुसार हुआ या नहीं, तथा हादसे के पीछे डिजाइन की खामी, घटिया निर्माण सामग्री या लापरवाही जिम्मेदार थी। इन सवालों के जवाब विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही सामने आ पाएंगे।