कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस की नई और संशोधित कार्यसमिति की सूची चुनाव आयोग को भेज दी। इसे पार्टी नेतृत्व पर अपनी पकड़ मजबूत दिखाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के नेतृत्व वाले विद्रोही गुट ने भी उसी दिन अलग कार्यसमिति बनाकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की।
चुनाव आयोग को भेजी गई नई सूची
तृणमूल कांग्रेस की ओर से जारी दस्तावेज के अनुसार, नई कार्यसमिति में ममता बनर्जी को चेयरपर्सन और अभिषेक बनर्जी को अखिल भारतीय महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि यह सूची दिल्ली स्थित चुनाव आयोग को भेज दी गई है, ताकि संगठन की आधिकारिक संरचना को स्पष्ट किया जा सके।
विद्रोही नेताओं को नहीं मिली जगह
नई कार्यसमिति में उन नेताओं को शामिल नहीं किया गया है जो हाल के दिनों में पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर सामने आए हैं। खासकर सायनी घोष, माला राय और अन्य नेताओं को सूची से बाहर रखा गया है। माना जा रहा है कि पार्टी अब संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
विद्रोही गुट ने भी बनाई अपनी टीम
इधर ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के नेतृत्व वाले गुट ने न्यू टाउन में बैठक कर अपनी अलग कार्यसमिति का ऐलान किया। इस गुट में कई वरिष्ठ नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। हालांकि ममता और अभिषेक को इस संरचना में कोई स्थान नहीं दिया गया है, जिससे दोनों पक्षों के बीच बढ़ती दूरी साफ दिखाई दे रही है।
संगठनात्मक लड़ाई पर बढ़ीं राजनीतिक अटकलें
राज्य में विधानसभा चुनाव के बाद से तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। नई कार्यसमिति और समानांतर संगठनात्मक गतिविधियों ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर राजनीतिक समीकरण किस दिशा में जाएंगे।
क्या है राजनीतिक संदेश?
विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव आयोग को संशोधित सूची भेजकर ममता बनर्जी ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि पार्टी की आधिकारिक कमान अब भी उनके हाथ में है। वहीं विद्रोही गुट अपने प्रभाव का प्रदर्शन कर संगठन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में जुटा हुआ है।