कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने सातवें वेतन आयोग के गठन की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शपथ ग्रहण के कुछ ही दिनों के भीतर आयोग के गठन को मंजूरी देकर राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत दी है।
दिसंबर 2026 तक आयोग के गठन का लक्ष्य
बजट के बाद आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि सातवें वेतन आयोग की अधिसूचना पहले ही जारी की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि आयोग को अपनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए दिसंबर 2026 तक का समय दिया गया है और सरकार निर्धारित समयसीमा के भीतर इसकी रिपोर्ट प्राप्त करने की उम्मीद कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की पहल की सराहना
हाल ही में पश्चिम बंगाल दिवस के अवसर पर राज्य दौरे पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सातवें वेतन आयोग को लेकर राज्य सरकार के प्रयासों की प्रशंसा की थी। इससे कर्मचारियों के बीच यह उम्मीद और मजबूत हुई है कि वेतन संबंधी लंबे समय से चली आ रही मांगों का समाधान जल्द हो सकता है।
आठवें वेतन आयोग को लेकर भी मिला संकेत
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सातवें वेतन आयोग के साथ-साथ भविष्य में आठवें वेतन आयोग की संभावना पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028-29 के आसपास राज्य सरकार आठवें वेतन आयोग को लेकर विचार-विमर्श कर सकती है। इस बयान को कर्मचारियों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
न्यूनतम वेतन में हो सकती है बड़ी बढ़ोतरी
सातवें वेतन आयोग के लागू होने पर कर्मचारियों का मूल वेतन छठे वेतन आयोग की तुलना में लगभग ढाई गुना तक बढ़ सकता है। शुरुआती स्तर के कर्मचारियों का बेसिक वेतन 18,000 रुपये से शुरू होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे निचले वर्ग के कर्मचारियों को सबसे अधिक लाभ मिल सकता है।
क्लर्क और ग्रुप-डी कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
वेतन संरचना के लेवल-1 से लेवल-5 तक के दायरे में आने वाले क्लर्क और ग्रुप-डी कर्मचारियों का मूल वेतन 18,000 रुपये से लेकर 92,300 रुपये तक हो सकता है। इससे बड़ी संख्या में कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है।
जूनियर अधिकारियों और सुपरवाइजरों के वेतन में भी इजाफा संभव
लेवल-6 से लेवल-9 के अंतर्गत आने वाले जूनियर अधिकारी, इंस्पेक्टर और सुपरवाइजरों का बेसिक वेतन 35,400 रुपये से बढ़कर 1,67,800 रुपये तक पहुंच सकता है। इससे मध्य स्तर के कर्मचारियों को भी महत्वपूर्ण लाभ मिलने की संभावना है।
ग्रुप-ए अधिकारियों के लिए भी बेहतर वेतनमान
लेवल-10 से लेवल-12 में शामिल ग्रुप-ए अधिकारियों और नीति-निर्माताओं का मूल वेतन 56,100 रुपये से 2,09,200 रुपये तक निर्धारित किया जा सकता है। यह वर्ग प्रशासनिक और नीतिगत जिम्मेदारियों का निर्वहन करता है।
वरिष्ठ अधिकारियों का वेतन पहुंच सकता है 2.5 लाख रुपये तक
लेवल-13 से लेवल-18 के अंतर्गत आने वाले वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों का बेसिक वेतन 1,01,500 रुपये से लेकर 2,50,000 रुपये तक हो सकता है। इससे राज्य प्रशासन के शीर्ष स्तर के अधिकारियों को भी लाभ मिलने की संभावना है।