नई दिल्ली। देश में त्योहारी सीजन की पूरी रौनक शुरू होने से पहले ही चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। दिल्ली से मुंबई और पश्चिम बंगाल तक खुदरा बाजार में चीनी के भाव पिछले एक महीने के दौरान काफी बढ़े हैं। कारोबारियों के मुताबिक आने वाले महीनों में मिठाइयों, बेकरी उत्पादों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए बाजार में चीनी की मांग अभी से बढ़ने लगी है।
दिल्ली से मुंबई तक कितनी बढ़ी चीनी की कीमत?
चीनी के खुदरा भाव में अलग-अलग शहरों में अलग स्तर पर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दिल्ली में जहां करीब एक महीने पहले चीनी लगभग 45 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, वहीं अब इसका भाव बढ़कर करीब 49 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है।
मुंबई में भी कीमतों में ज्यादा तेजी देखने को मिली है। यहां चीनी का भाव करीब 46 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 52 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल में तो खुदरा बाजार में चीनी करीब 55 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रही है।यानी कई प्रमुख बाजारों में चीनी की कीमतों में एक महीने के भीतर करीब 8 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
त्योहारों से पहले बढ़ी मांग ने बढ़ाया दबाव
अगस्त से देश में त्योहारों का सिलसिला शुरू हो जाता है। इसके बाद रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, दशहरा, दिवाली और क्रिसमस जैसे बड़े त्योहार लगातार आते हैं। इस दौरान मिठाइयों के अलावा बिस्किट, आइसक्रीम, मिठाई और शीतल पेय जैसे उत्पादों की खपत बढ़ जाती है।इन सभी उत्पादों में चीनी की बड़ी मात्रा में इस्तेमाल होती है। ऐसे में त्योहारों की मांग को देखते हुए थोक खरीदार और कारोबारी पहले से स्टॉक जुटाने में लगे हैं। बाजार में अचानक बढ़ी खरीदारी का असर कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।
30 साल के निचले स्तर पर पहुंच सकता है चीनी का स्टॉक
चीनी की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह घरेलू स्टॉक को भी माना जा रहा है। उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक पिछले सीजन में उत्पादन कम रहने और करीब 8 लाख टन चीनी के निर्यात के चलते नए सीजन की शुरुआत में मिलों के पास बचा स्टॉक लगभग 35 लाख टन रह सकता है।यह स्टॉक करीब तीन दशक में सबसे कम स्तरों में से एक बताया जा रहा है। सीमित स्टॉक को देखते हुए मिलों और कारोबारियों के बीच आगे कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है। इसका असर बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों दोनों पर पड़ रहा है।
मौसम की मार से गन्ने का उत्पादन प्रभावित
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे मौसम की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य हैं। इन क्षेत्रों में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों और कुछ इलाकों में सामान्य से कम बारिश का असर गन्ने की पैदावार पर पड़ा है।कम गन्ना उत्पादन का सीधा प्रभाव चीनी के उत्पादन पर पड़ सकता है। यही वजह है कि बाजार में आने वाले महीनों की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी असर
घरेलू बाजार के अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीनी की संभावित कमी की आशंका भी कीमतों पर दबाव बढ़ा रही है। वैश्विक बाजार में आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता होने पर घरेलू बाजार में भी कारोबारियों की रणनीति बदल सकती है।इसके साथ ही परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने का असर भी चीनी की अंतिम कीमत पर पड़ रहा है। गन्ने से लेकर मिल और फिर बाजार तक उत्पाद पहुंचाने में आने वाला खर्च बढ़ने से कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
सरकार ने स्टॉक लिमिट लागू की
बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने कारोबारियों के चीनी भंडारण को लेकर कदम उठाया है। सरकार ने 30 नवंबर 2026 तक स्टॉक लिमिट लागू की है। इसके तहत व्यापारी एक समय में 4,000 क्विंटल से अधिक चीनी का भंडारण नहीं कर सकेंगे।इस व्यवस्था का उद्देश्य बाजार में अनावश्यक जमाखोरी पर रोक लगाना और चीनी की उपलब्धता बनाए रखना है। सरकार की नजर बाजार में स्टॉक और कीमतों की स्थिति पर बनी हुई है।
चीनी के निर्यात पर भी रोक
घरेलू बाजार में आपूर्ति पर्याप्त रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए चीनी के निर्यात को लेकर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने की कोशिश की जा रही है, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्धता और कीमतों का असर भारतीय उपभोक्ताओं पर ज्यादा न पड़े।सरकार की कोशिश है कि त्योहारी सीजन के दौरान मांग बढ़ने के बावजूद बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे।
अक्टूबर में ही शुरू हो सकती है गन्ने की पेराई
त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए चीनी की नई सप्लाई बाजार में जल्द लाने की तैयारी भी की जा रही है। सरकार के निर्देशों के बाद उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की चीनी मिलों में इस बार गन्ने की पेराई सामान्य समय से पहले शुरू करने की योजना है।बताया जा रहा है कि कई मिलें नवंबर के बजाय अक्टूबर के मध्य में ही पेराई शुरू कर सकती हैं। इससे करीब 10 से 15 दिन पहले नई चीनी बाजार में उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
आम लोगों की जेब पर पड़ेगा असर?
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल सीधे चीनी खरीदने वाले उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहता। मिठाई, बेकरी उत्पाद, पेय पदार्थ और अन्य खाद्य वस्तुओं की उत्पादन लागत में भी इसका प्रभाव दिखाई दे सकता है।त्योहारी सीजन में इन उत्पादों की मांग पहले से ज्यादा रहती है। ऐसे में यदि चीनी के दाम आगे भी बढ़ते हैं तो मिठाइयों और अन्य चीनी आधारित उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल कीमतों पर नजर
सरकार की ओर से स्टॉक लिमिट, निर्यात नियंत्रण और जल्द पेराई शुरू करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। इन उपायों का उद्देश्य घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रण में रखना है।हालांकि, आने वाले दिनों में चीनी की कीमत किस दिशा में जाती है, यह गन्ने की उपलब्धता, नई चीनी की बाजार में आवक, त्योहारी मांग और घरेलू-अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल त्योहारों से पहले चीनी के बढ़ते भाव ने उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।