नई दिल्ली - बच्चों को इंटरनेट और सोशल मीडिया के संभावित दुष्प्रभावों से बचाने के लिए संसद में एक नए प्राइवेट मेंबर बिल को पेश करने की तैयारी की गई है। भारतीय जनता पार्टी के सांसद बैजयंत ‘जय’ पांडा की ओर से तैयार किए गए “Safeguarding Healthy Internet Environments for Little Digital-Natives” (SHIELD) Bill, 2025 में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं।

सोशल मीडिया अकाउंट को लेकर सख्त नियम
प्रस्तावित बिल में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियम बनाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य कम उम्र के बच्चों को ऐसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से बचाना है, जहां उन्हें अनुचित कंटेंट, साइबरबुलिंग या अन्य डिजिटल जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। बिल में बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट बनाए जाने और उनके इस्तेमाल को लेकर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय प्रस्तावित किए गए हैं।
बच्चों के डेटा की सुरक्षा पर जोर
SHIELD Bill में डेटा प्राइवेसी को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। बच्चों की व्यक्तिगत जानकारी का इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है, इसे लेकर कड़े नियम प्रस्तावित किए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों से जुड़ा संवेदनशील डेटा बिना उचित सुरक्षा और अनुमति के गलत तरीके से इस्तेमाल न हो।
ऑनलाइन गेमिंग पर भी नजर
बिल में बच्चों की ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियों को लेकर भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का प्रस्ताव है। ऑनलाइन गेम्स में मौजूद ऐसे फीचर्स, जो बच्चों को अत्यधिक समय बिताने या अनियंत्रित तरीके से खर्च करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं, उन्हें लेकर नियम बनाए जाने की जरूरत बताई गई है।
पर्सनलाइज्ड विज्ञापनों पर लगाम
बच्चों को उनकी ऑनलाइन गतिविधियों और व्यक्तिगत जानकारी के आधार पर दिखाए जाने वाले पर्सनलाइज्ड विज्ञापनों को लेकर भी बिल में सख्ती का प्रस्ताव है। इसका मकसद बच्चों को डेटा आधारित विज्ञापन प्रणाली के संभावित प्रभावों से बचाना है।
डिजिटल दुनिया में बढ़ रही चुनौतियां
बच्चों की इंटरनेट तक बढ़ती पहुंच के साथ ऑनलाइन सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुकी है। सोशल मीडिया, गेमिंग और डिजिटल कंटेंट के बढ़ते इस्तेमाल के बीच बच्चों को साइबरबुलिंग, अनुचित सामग्री, डेटा के दुरुपयोग और अत्यधिक स्क्रीन टाइम जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में प्रस्तावित SHIELD Bill का फोकस बच्चों के लिए ज्यादा सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल वातावरण तैयार करने पर है।
बिल का आगे क्या होगा?
यह एक प्राइवेट मेंबर बिल है, इसलिए इसे कानून का रूप लेने के लिए संसद में निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना होगा। प्रस्तावित प्रावधानों पर सदन में चर्चा और आगे की संसदीय प्रक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इनमें से कौन-कौन से प्रावधान अंतिम रूप में कानून का हिस्सा बनते हैं।