दुनियाभर में बढ़ते जलवायु परिवर्तन ने अब नदियों के प्राकृतिक संतुलन को भी गंभीर रूप से प्रभावित करना शुरू कर दिया है। एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में खुलासा हुआ है कि पृथ्वी के तापमान में लगातार हो रही वृद्धि के कारण नदियों में घुली ऑक्सीजन की मात्रा तेजी से कम हो रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति केवल जल गुणवत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि मछलियों, जलीय जीवों और पूरी जैव विविधता के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दशकों में कई नदियां जीवनविहीन क्षेत्रों में बदल सकती हैं।
21 हजार से अधिक नदियों का किया गया अध्ययन
यह शोध चीन के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया, जिसमें वर्ष 1985 से अब तक दुनिया की 21 हजार से अधिक नदियों के ऑक्सीजन स्तर का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में उपग्रह तकनीक और कृत्रिम मेधा यानी AI की मदद ली गई। यह शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका ‘साइंस एडवांसेज’ में प्रकाशित हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले चार दशकों में दुनियाभर की नदियों में ऑक्सीजन का स्तर औसतन 2.1 प्रतिशत तक घट चुका है। वैज्ञानिकों का कहना है कि आंकड़ा भले छोटा दिखाई दे, लेकिन इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं।
क्यों घट रही है नदियों में ऑक्सीजन?
वैज्ञानिकों के अनुसार गर्म पानी में ऑक्सीजन कम मात्रा में घुलती है। जलवायु परिवर्तन के कारण नदियों का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे पानी में मौजूद ऑक्सीजन वातावरण में तेजी से निकलने लगती है। इसके अलावा रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग, शहरों का गंदा पानी, औद्योगिक प्रदूषण, बांध निर्माण और जल प्रवाह में बदलाव जैसी गतिविधियां भी स्थिति को और गंभीर बना रही हैं। अध्ययन में पाया गया कि इस संकट का लगभग 63 प्रतिशत कारण केवल पानी का बढ़ता तापमान है।
गंगा नदी को लेकर सबसे गंभीर चेतावनी
अध्ययन में भारत की गंगा नदी को लेकर बेहद चिंताजनक स्थिति सामने आई है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस सदी की शुरुआत में गंगा में ऑक्सीजन की कमी वैश्विक औसत की तुलना में लगभग 20 गुना तेज गति से दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कार्बन उत्सर्जन और जल प्रदूषण की मौजूदा स्थिति जारी रही, तो आने वाले वर्षों में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों में ऑक्सीजन का स्तर खतरनाक रूप से गिर सकता है। इससे लाखों जलीय जीवों का जीवन संकट में पड़ जाएगा।
मछलियों और जैव विविधता पर मंडरा रहा बड़ा खतरा
नदियों में ऑक्सीजन की कमी का सबसे बड़ा असर मछलियों और अन्य जलीय जीवों पर पड़ता है। ऑक्सीजन स्तर घटने से जीवों की प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है और बड़ी संख्या में उनकी मौत होने लगती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो कई नदियों में जैव विविधता तेजी से खत्म हो सकती है। इसके साथ ही पानी की गुणवत्ता भी खराब होगी, जिसका असर मानव जीवन और कृषि पर भी पड़ेगा।
“डेड ज़ोन” बनने का बढ़ रहा खतरा
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि भविष्य में कई नदियां “डेड ज़ोन” में बदल सकती हैं। डेड ज़ोन ऐसे क्षेत्र होते हैं जहां पानी में ऑक्सीजन इतनी कम हो जाती है कि वहां जलीय जीवन लगभग समाप्त हो जाता है। समुद्री क्षेत्रों में पहले से यह समस्या देखी जा रही थी, लेकिन अब नदियों में भी ऐसे हालात बनने लगे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित नहीं किया गया और जल संरक्षण पर गंभीर प्रयास नहीं हुए, तो आने वाले दशकों में स्थिति और भयावह हो सकती है।
वैज्ञानिकों ने दिए तत्काल कार्रवाई के संकेत
अध्ययन से जुड़े वैज्ञानिकों ने सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से तुरंत प्रभावी कदम उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि कार्बन उत्सर्जन में कमी, औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण, स्वच्छ जल प्रबंधन और नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अभी से ठोस कदम उठाए जाएं, तो नदियों को इस बड़े संकट से बचाया जा सकता है।