नई दिल्ली: ईरान युद्ध (Iran War) के चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डगमगाती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने एक बेहद बड़ा और साहसिक कदम उठाया है। विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) के संकट से निपटने और भारतीय बाजार में विदेशी पूंजी निवेश (Foreign Investment) को तेजी से आकर्षित करने के लिए सरकार ने सरकारी ऋणपत्रों (Government Bonds) पर लगने वाले मूलधनी लाभ कर (Capital Gains Tax) को पूरी तरह से हटाने का फैसला किया है।
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय कैबिनेट ने इस ऐतिहासिक फैसले को अमलीजामा पहनाने के लिए आयकर कानून में संशोधन से जुड़े एक अध्यादेश (Ordinance) को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति की अंतिम सहमति मिलने के बाद यह नया नियम देश में लागू हो जाएगा।
प्रधानमंत्री की अपील बेअसर होने के बाद बड़ा एक्शन
उल्लेखनीय है कि ईरान युद्ध के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। विदेशी मुद्रा बचाने के उद्देश्य से कुछ हफ्ते पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से कई खास अपीलें भी की थीं, लेकिन उससे बाजार की सेहत में कुछ खास सुधार नहीं देखा गया। डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत लगातार रिकॉर्ड स्तर पर गिरती जा रही है। इसी को थामने के लिए अब सरकार ने सीधे विदेशी निवेशकों (FIIs) को टैक्स में बड़ी छूट देकर भारत की तरफ मोड़ने की रणनीति अपनाई है।
अभी कितना टैक्स देते हैं विदेशी निवेशक?
वर्तमान टैक्स स्लैब के अनुसार, भारत में विदेशी निवेशकों को सरकारी ऋणपत्रों और लिस्टेड शेयरों पर काफी टैक्स चुकाना पड़ता था:
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स: 12 महीने से अधिक समय तक रखे गए सरकारी बॉन्ड और लिस्टेड शेयरों के निवेश पर विदेशी निवेशकों को 12.5% का दीर्घकालिक मूलधनी लाभ कर देना होता है।
विद्होल्डिंग टैक्स: इसके अलावा, सरकारी ऋणपत्रों से मिलने वाले ब्याज (Interest) पर भी उन्हें 20% का विद्होल्डिंग टैक्स देना पड़ता है।
आगे भी मिल सकती है राहत: सूत्रों का कहना है कि मोदी सरकार आने वाले दिनों में विदेशी मुद्रा का संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ और रियायतें दे सकती है। सरकार सरकारी बॉन्ड से होने वाली ब्याज आय (Interest Income) पर भी टैक्स छूट देने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से निकाले 2.5 लाख करोड़
सरकार की इस बड़ी घोषणा के पीछे हाल ही में आई एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अस्थिरता के चलते चालू वर्ष में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचकर अपनी पूंजी बाहर निकाल ली है। विदेशी निवेश में आई इस भारी गिरावट के कारण यह साल हाल के समय के सबसे खराब दौर के रूप में देखा जा रहा है। इसी भारी बिकवाली के कारण रुपया लगातार कमजोर हो रहा था, जिसे थामने के लिए मोदी सरकार ने अब 'टैक्स फ्री' बॉन्ड का यह मास्टरस्ट्रोक खेला है।