DPAP के चीफ गुलाम नबी आजाद ने कहा कि, उन्हें 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले "विपक्षी एकता" से कोई लाभ होता नहीं दिख रहा। पटना में होने वाली विपक्षी दलों की बैठक के बारे में पूछे जाने पर आजाद ने कहा कि, उन्हें इसमें आमंत्रित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि, विपक्षी एकता का लाभ तभी मिलेगा जब दोनों पक्षों के लिए कुछ होगा। दोनों के लिए लाभ के हिस्से में अंतर हो सकता है । यह 50-50 या 60-40 हो सकता है, लेकिन इस मामले में, दोनों पक्षों के पास दूसरे को देने के लिए कुछ भी नहीं है।
पश्चिम बंगाल में TMC को कांग्रेस के गठबंधन कर के क्या लाभ होगा
गुलाम नबी आजाद ने आगे पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि, कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का राज्य में कोई विधायक नहीं है और सोचने वाली बात है कि, अगर दोनों पार्टियां TMC के साथ गठबंधन करती हैं, तो इसमें TMC को क्या फायदा होगा। आजाद ने कहा कि, बनर्जी गठबंधन क्यों करेंगी? इससे उन्हें क्या फायदा होगा? इसी प्रकार TMC का राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में कोई विधायक नहीं है। कांग्रेस उन्हें इन राज्यों में क्या देगी? कुछ भी नहीं।
मैं चाहता हूं 2024 के चुनाव में विपक्ष एकजुट हो
उन्होंने आगे कहा कि, आंध्र प्रदेश के सीएम रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआरसीपी के पास कहीं और कोई विधायक नहीं है। उन्होंने पूछा कि, कांग्रेस उन्हें (रेड्डी को) क्या देगी और रेड्डी कांग्रेस को क्या देंगे। वहीं आगे बोलते हुए आजाद ने साफ कहा है कि, वह चाहते हैं कि, आम चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए विपक्ष एकजुट हो जाए। लेकिन दुर्भाग्य से, प्रत्येक विपक्षी दल के पास अपने राज्य के अलावा अन्य राज्यों में कुछ भी नहीं है। यदि दो-तीन दलों ने राज्यों में (गठबंधन में) सरकारें बनाई होती तो यह फायदेमंद होता।
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