अहमदाबाद - केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महात्मा गांधी के विचारों को वर्तमान समय में भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि गांधी जी की प्रासंगिकता कभी खत्म नहीं होगी। उन्होंने कहा कि गांधी अपने समय में भी प्रासंगिक थे, आज भी हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उनके विचार मार्गदर्शक बने रहेंगे। शाह ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार गांधी जी के ग्राम स्वराज, समृद्धि और सहकारिता जैसे सिद्धांतों को आधार बनाकर विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम कर रही है।
गुजरात विद्यापीठ के दीक्षा समारोह में पहुंचे शाह
अमित शाह ने गुरुवार को अहमदाबाद स्थित गुजरात विद्यापीठ के 72वें दीक्षा समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान से अपने पुराने जुड़ाव को भी याद किया। शाह ने बताया कि वह गुजरात विद्यापीठ की लाइब्रेरी में नियमित रूप से पढ़ने आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि भविष्य में इसी संस्थान के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने का अवसर मिलेगा।
गांधी के विचारों को भारतीय जीवन पद्धति से जोड़ा
महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि उनके संदेशों में भारतीय जीवनशैली, संस्कृति और मूल्यों की गहरी छाप दिखाई देती है। उनके मुताबिक गांधी जी ने भारतीय सभ्यता और परंपराओं की ताकत को समझते हुए इन्हीं मूल्यों को सार्वजनिक जीवन से जोड़ने का प्रयास किया। शाह ने गांधी जी द्वारा बताए गए सात सामाजिक पापों का भी उल्लेख किया। इनमें सिद्धांतहीन राजनीति, चरित्रहीन ज्ञान और त्याग के बिना उपासना जैसे विचार शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने गांधी के सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह समेत 11 व्रतों की भी चर्चा की।
स्वच्छता से स्वदेशी तक गांधी के संदेश
अमित शाह ने कहा कि महात्मा गांधी ने स्वच्छता को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना था। इसी संदर्भ में उन्होंने केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान और हर घर शौचालय के संकल्प का उल्लेख किया। उन्होंने गांधी जी के स्वदेशी और खादी के संदेश को भी रेखांकित किया। शाह के मुताबिक गांधी के लिए खादी केवल आर्थिक गतिविधि नहीं थी, बल्कि यह देश के प्रति प्रेम और आत्मनिर्भरता की भावना से जुड़ी थी। उन्होंने दावा किया कि पहले खादी की सालाना बिक्री करीब 31 हजार करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर सवा लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।
‘नव निर्माण’ नहीं, पुनर्निर्माण की बात करते थे गांधी
गृह मंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी का जोर समाज और देश के पुनर्निर्माण पर था। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने अपने विचारों में ‘नव निर्माण’ की बजाय ‘पुनर्निर्माण’ की बात की, क्योंकि उनका मानना था कि समाज की मजबूत नींव उसके मूल्यों और परंपराओं से जुड़ी होती है। शाह ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि जीवन के लक्ष्य केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं होने चाहिए। लक्ष्य समाज और देश के हित से जुड़े हों तो मुश्किल परिस्थितियों में भी व्यक्ति निराश नहीं होता।
‘मैंने जीवन में कई कठिनाइयां झेलीं’
अपने निजी अनुभवों का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कई मुश्किल दौर देखे हैं, लेकिन परिस्थितियां उनका मनोबल नहीं तोड़ सकीं। उन्होंने इसकी वजह अपने जीवन के लक्ष्यों को समाज और देश के प्रति समर्पित रखना बताया। शाह ने कहा कि जब व्यक्ति का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत लाभ नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए कुछ करने का होता है, तो असफलता भी उसे पूरी तरह निराश नहीं कर पाती। कई बार कोई लक्ष्य वर्तमान पीढ़ी पूरा नहीं कर पाती, लेकिन आने वाली पीढ़ी उस जिम्मेदारी को आगे बढ़ा सकती है। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि वे ऐसे लक्ष्य निर्धारित करें जिनका लाभ केवल उन्हें नहीं, बल्कि समाज और देश को भी मिले। उनके अनुसार यही सोच कठिनाइयों के बीच व्यक्ति को लगातार आगे बढ़ने की ताकत देती है।