राजस्थान - रक्षाबंधन को आमतौर पर भाई-बहन के प्यार, भरोसे और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन राजस्थान के 37 वर्षीय रामस्वरूप गुर्जर और उनकी 60 वर्षीय बहन सुगना की कहानी इस रिश्ते को एक अलग ही अर्थ देती है। रामस्वरूप के लिए अब राखी का त्योहार केवल कलाई पर बंधे धागे का नाम नहीं है, बल्कि यह उस रिश्ते की याद है जिसने उन्हें जिंदगी दोबारा जीने का मौका दिया।
दर्द की दवा बनी किडनी खराब होने की वजह
रामस्वरूप लंबे समय से पीठ के तेज दर्द से परेशान थे। दर्द से राहत पाने के लिए वह लगातार पेनकिलर दवाओं का इस्तेमाल करते रहे। शुरुआत में इन दवाओं से उन्हें राहत मिलती रही, लेकिन समय के साथ उनकी सेहत पर इसका गंभीर असर पड़ा। धीरे-धीरे उनकी दोनों किडनियां खराब हो गईं और एक समय ऐसा आया जब दोनों ने काम करना बंद कर दिया। बीमारी की गंभीरता सामने आने के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती रामस्वरूप की जान बचाने की थी। डॉक्टरों ने उनके लिए किडनी ट्रांसप्लांट को जरूरी बताया।
बड़ी बहन सुगना ने आगे बढ़ाया हाथ
छह भाई-बहनों के परिवार में जब रामस्वरूप के लिए डोनर की जरूरत पड़ी, तब उनकी सबसे बड़ी बहन सुगना बिना किसी झिझक के सामने आईं। 60 साल की उम्र में उन्होंने अपने छोटे भाई की जिंदगी बचाने के लिए अपनी एक किडनी दान करने का फैसला किया। 25 अगस्त 2023 को जयपुर के एक निजी अस्पताल में रामस्वरूप का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। सुगना ने अपनी किडनी अपने भाई को दान की। वह इस फैसले को किसी बड़े बलिदान के तौर पर नहीं देखतीं। उनके लिए भाई की मदद करना परिवार और रिश्ते की स्वाभाविक जिम्मेदारी थी।
ट्रांसप्लांट के बाद फिर खेतों में लौटे रामस्वरूप
किडनी ट्रांसप्लांट के बाद रामस्वरूप की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। इलाज और रिकवरी के बाद वह अपने गांव वापस लौट सके। अब वह पहले की तरह खेती का काम कर रहे हैं और खुद को काफी स्वस्थ महसूस करते हैं। खास बात यह है कि किडनी दान करने वाली उनकी बहन सुगना भी स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन जी रही हैं। इस तरह एक बहन के फैसले ने न सिर्फ रामस्वरूप को जीवन दिया, बल्कि परिवार को भी दोबारा खुशियों का मौका मिला।
‘मेरी जिंदगी मेरी बहन की वजह से है’
रामस्वरूप के लिए इस घटना के बाद रक्षाबंधन का अर्थ पहले जैसा नहीं रहा। उनके मुताबिक, बहन सिर्फ राखी बांधकर उनकी सलामती की दुआ नहीं करतीं, बल्कि उनकी बहन ने वास्तव में उनकी जिंदगी बचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। रामस्वरूप का कहना है कि अगर उन्हें अपनी जिंदगी के लिए किसी का सबसे ज्यादा आभार मानना है, तो वह उनकी बहन सुगना हैं। उन्होंने बताया कि वह किसान हैं और अब नियमित रूप से खेती कर पा रहे हैं। उनके लिए सामान्य जीवन में लौटना किसी दूसरी जिंदगी मिलने जैसा है।
एसएमएस अस्पताल में सामने आया चौंकाने वाला पैटर्न
यह कहानी सरकारी सवाई मान सिंह यानी एसएमएस अस्पताल में सामने आए एक बड़े सामाजिक पैटर्न की ओर भी ध्यान खींचती है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वहां किडनी ट्रांसप्लांट के मामलों में कई बार बहनें या महिलाएं अपने परिवार के पुरुष सदस्यों के लिए अंगदान करती दिखाई दी हैं। बताया गया है कि ऐसे मामलों में 31 बहनों ने भाइयों को किडनी दान की, जबकि भाई द्वारा बहन को किडनी दान करने का आंकड़ा सिर्फ एक रहा। यह आंकड़ा भाई-बहन के रिश्ते में देखी जाने वाली देखभाल और त्याग की एक अलग तस्वीर सामने रखता है। रक्षाबंधन पर जहां भाई अक्सर बहन की सुरक्षा का संकल्प लेते हैं, वहीं रामस्वरूप और सुगना की कहानी दिखाती है कि कई बार वही रक्षा एक बहन अपने भाई के लिए अपने जीवन का हिस्सा देकर करती है।