पुणे - पुणे में कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में दिए गए बयान को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी के ‘पितृसत्ता को खत्म करने’ वाले आह्वान पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस और राहुल गांधी की राजनीतिक शैली पर तीखा हमला बोला।
‘नारा सिर्फ पुणे के मंच तक सीमित है?’
बांसुरी स्वराज ने कहा कि वह पितृसत्ता को खत्म करने की सोच का पूरी तरह समर्थन करती हैं, लेकिन राहुल गांधी से सवाल है कि क्या उनका यह नारा सिर्फ पुणे के मंच तक सीमित है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी एक तरफ देश में पितृसत्ता के खिलाफ बात करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी के भीतर राजनीतिक पितृसत्ता को बढ़ावा देने का आरोप झेल रहे हैं। बीजेपी सांसद ने कहा कि अगर राहुल गांधी वास्तव में इस सोच को खत्म करना चाहते हैं, तो इसकी शुरुआत उन्हें अपनी पार्टी से करनी चाहिए।
राहुल गांधी के विजन पर भी उठाए सवाल
बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी पर युवाओं और मतदाताओं को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पास स्पष्ट विजन और सकारात्मक एजेंडा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी अपनी रिसर्च टीम से मिले नोट्स के आधार पर बयान देते हैं और राजनीतिक नैरेटिव बनाने की कोशिश करते हैं। बीजेपी सांसद ने कांग्रेस के राजनीतिक रिकॉर्ड का जिक्र करते हुए राहुल गांधी से पार्टी के भीतर महिलाओं की भूमिका और नेतृत्व को लेकर भी सवाल पूछे।
जॉर्जिया मेलोनी का भी किया जिक्र
अपने बयान में बांसुरी स्वराज ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने कुछ समय पहले मेलोनी को लेकर किए गए एक आपत्तिजनक मजाक में हिस्सा लिया था। बांसुरी ने इसे राहुल गांधी के ‘पितृसत्ता खत्म करने’ वाले बयान से जोड़ते हुए कहा कि अगर महिलाओं के सम्मान और समानता की बात की जा रही है, तो राजनीतिक नेताओं को अपने व्यवहार में भी वही मानक अपनाने चाहिए।
बीजेपी-कांग्रेस के बीच बढ़ सकती है सियासी तकरार
राहुल गांधी के पुणे कार्यक्रम में युवाओं, महिलाओं और सामाजिक बदलाव से जुड़े मुद्दों पर दिए गए बयानों को लेकर बीजेपी लगातार कांग्रेस पर निशाना साध रही है। वहीं, कांग्रेस की ओर से बीजेपी के आरोपों पर जवाब दिए जाने की संभावना है। इस पूरे विवाद से एक बार फिर महिला सम्मान, राजनीतिक नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी और पितृसत्ता जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। आने वाले दिनों में राहुल गांधी या कांग्रेस की ओर से बांसुरी स्वराज के आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
पुणे के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती देने और उसे खत्म करने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि समाज में महिलाओं को बराबरी का अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने युवाओं के बीच लैंगिक समानता और महिलाओं की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए मौजूदा सामाजिक व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताई।
राहुल गांधी का यह संदेश मुख्य रूप से ऐसी सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ था, जिसमें महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम अधिकार या अवसर दिए जाते हैं। उनके इस बयान को महिला समानता और सामाजिक बदलाव के उनके व्यापक राजनीतिक संदेश से जोड़कर देखा गया।