नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने प्राकृतिक और मानवजनित आपदाओं से निपटने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल विकसित करने की दिशा में विस्तृत मानक तय किए हैं। इन बलों का गठन, प्रशिक्षण, उपकरणों की व्यवस्था और संचालन अगले 5 वर्षों के भीतर चरणबद्ध तरीके से करने की योजना है। इसका उद्देश्य आपदा के समय केवल केंद्रीय बलों पर निर्भरता कम करना और स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित, त्वरित तथा सक्षम प्रतिक्रिया तंत्र तैयार करना है। प्रस्तावित विशेष बल राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की तर्ज पर काम करेंगे और बाढ़, भूकंप, भूस्खलन, औद्योगिक दुर्घटना तथा अन्य गंभीर आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
अग्निवीरों और NCC प्रमाणपत्र धारकों को मिलेगी प्राथमिकता
नए दिशानिर्देशों के अनुसार, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बलों में प्रत्यक्ष भर्ती के दौरान अग्निवीरों और राष्ट्रीय कैडेट कोर यानी NCC के प्रमाणपत्र धारकों को प्राथमिकता देने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे युवाओं की क्षमता और प्रशिक्षण का उपयोग करना है, जिन्हें अनुशासन, शारीरिक दक्षता और आपात परिस्थितियों में कार्य करने का अनुभव प्राप्त है। आपदा प्रतिक्रिया जैसे चुनौतीपूर्ण कार्यों में त्वरित निर्णय, टीमवर्क और कठिन परिस्थितियों में काम करने की क्षमता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में पहले से प्रशिक्षित युवाओं को प्राथमिकता देने की नीति इन बलों की कार्यक्षमता को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
महिलाओं के लिए 15% पद आरक्षित रखने का प्रावधान
केंद्र के दिशानिर्देशों में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत कुल रिक्तियों में 15% पद महिलाओं के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है। आपदा के दौरान राहत शिविरों, बचाव अभियानों और विशेष रूप से महिलाओं तथा बच्चों से जुड़े संवेदनशील मामलों में महिला कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। सरकार की यह पहल आपदा प्रबंधन व्यवस्था में लैंगिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने के साथ ही स्थानीय समुदायों तक अधिक प्रभावी और संवेदनशील सहायता पहुंचाने में भी सहायक हो सकती है।
NDRF की तर्ज पर होगा प्रशिक्षण और संचालन
राज्य स्तर पर गठित होने वाले विशेष बलों का ढांचा राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल यानी NDRF की कार्यप्रणाली को ध्यान में रखकर विकसित किया जाएगा। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी NDMA की ओर से जारी दिशानिर्देशों में भर्ती, प्रशिक्षण, उपकरण, संचालन और क्षमता निर्माण के लिए एक समान रूपरेखा उपलब्ध कराई गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अलग-अलग राज्यों में बनने वाले बलों के प्रशिक्षण और कार्यक्षमता में आवश्यक मानक बने रहें। बड़े स्तर की आपदा आने पर ये इकाइयां NDRF और पड़ोसी राज्यों के आपदा प्रतिक्रिया बलों के साथ समन्वय बनाकर संयुक्त अभियान भी चला सकेंगी।
2025 के संशोधित कानून के बाद बढ़ी राज्यों की जिम्मेदारी
संसद से पिछले वर्ष पारित संशोधित आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2025 के तहत प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के लिए विशेष राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की व्यवस्था को अनिवार्य किया गया है। इसके बाद केंद्र ने राज्यों को बलों के गठन और संचालन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य आपदा प्रबंधन क्षमता को अधिक विकेंद्रीकृत बनाना है, ताकि किसी दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा के शुरुआती घंटों में स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित टीमें तुरंत कार्रवाई कर सकें और राहत एवं बचाव कार्यों में होने वाली देरी को कम किया जा सके।
पर्यटक स्थलों पर सुरक्षा ऑडिट भी होगी बड़ी जिम्मेदारी
प्रस्तावित राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल केवल आपदा आने के बाद बचाव कार्यों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि जोखिम कम करने और पूर्व तैयारी की दिशा में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। दिशानिर्देशों के तहत प्रमुख पर्यटक स्थलों और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा ऑडिट करने की जिम्मेदारी भी इन इकाइयों को दी जा सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों, नदी किनारे स्थित पर्यटन स्थलों, समुद्री इलाकों और अन्य जोखिम वाले क्षेत्रों में संभावित खतरों की पहचान कर पहले से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में यह तंत्र उपयोगी साबित हो सकता है।
कानून-व्यवस्था लागू करना नहीं होगा मुख्य दायित्व
राज्य आपदा प्रतिक्रिया बलों की भूमिका को स्पष्ट करते हुए यह भी तय किया गया है कि इन इकाइयों का मुख्य उद्देश्य आपदा प्रबंधन, राहत और बचाव कार्य होगा। इन्हें सामान्य सशस्त्र कानून-प्रवर्तन जिम्मेदारियों के लिए तैयार नहीं किया जाएगा। इससे बलों का प्राथमिक फोकस मानवीय सहायता, खोज एवं बचाव, आपातकालीन प्रतिक्रिया और जोखिम कम करने के कार्यों पर बना रहेगा। हालांकि किसी बड़े संकट के दौरान स्थानीय प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय आवश्यकतानुसार किया जाएगा।
विकेंद्रीकृत आपदा तैयारी को मिलेगी नई ताकत
देश के अलग-अलग हिस्सों में बाढ़, चक्रवात, भूस्खलन, भूकंप, औद्योगिक दुर्घटनाओं और अन्य आपदाओं की बढ़ती चुनौतियों के बीच राज्यों में विशेष प्रतिक्रिया बल तैयार करने की पहल को आपदा प्रबंधन क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगले 5 वर्षों में यदि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इन इकाइयों को निर्धारित मानकों के अनुसार प्रशिक्षित और सुसज्जित किया जाता है, तो स्थानीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई की क्षमता मजबूत हो सकती है। अग्निवीरों और NCC प्रशिक्षित युवाओं को प्राथमिकता तथा महिलाओं के लिए 15% आरक्षण जैसे प्रावधानों के साथ यह नई व्यवस्था भारत के विकेंद्रीकृत आपदा प्रतिक्रिया ढांचे को और व्यापक बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।