नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं की व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए शुक्रवार को उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि करेंगे और इसके दायरे में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाएं भी शामिल होंगी। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता, सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। नई समिति से उम्मीद की जा रही है कि वह मौजूदा परीक्षा व्यवस्था की कमियों का अध्ययन कर तकनीकी और संस्थागत स्तर पर सुधार का खाका तैयार करेगी।
इस टास्क फोर्स का गठन उस पृष्ठभूमि में हुआ है, जब नीट में कथित अनियमितताओं को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों ने 36 दिनों तक आंदोलन किया था। इस आंदोलन का असर केंद्र सरकार की परीक्षा नीति पर भी पड़ा और परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता प्रमुख राजनीतिक तथा प्रशासनिक मुद्दा बन गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने 6 सदस्यीय समिति के गठन की घोषणा की थी। अब सरकार ने औपचारिक रूप से इसके गठन और जिम्मेदारियों को स्पष्ट कर दिया है।
समिति में तकनीक से लेकर अंतरिक्ष तक के विशेषज्ञ
नंदन नीलेकणि के अलावा समिति में विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इनमें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, पूर्व इंटेलिजेंस ब्यूरो निदेशक तपन डेका, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनिता करवाल और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं। समिति की संरचना से संकेत मिलता है कि परीक्षा सुधार को केवल शिक्षा से जुड़ा विषय न मानकर तकनीक, सुरक्षा, प्रशासन और बुनियादी ढांचे से जुड़े व्यापक मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिति की घोषणा करते समय कहा था कि इसका उद्देश्य राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की परीक्षा व्यवस्था में तकनीकी हस्तक्षेप और संरचनात्मक सुधार के सुझाव देना है। परीक्षा के दौरान पहचान सत्यापन, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, डेटा प्रबंधन, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और परिणाम तैयार करने जैसी प्रक्रियाओं में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में विशेषज्ञों से यह अपेक्षा होगी कि वे ऐसी व्यवस्था का सुझाव दें, जिसमें तकनीक का इस्तेमाल परीक्षा की विश्वसनीयता बढ़ाने के साथ-साथ छात्रों के लिए प्रक्रिया को सरल और अधिक पारदर्शी बनाने में भी हो।
परीक्षा के संचालन और सुरक्षा की होगी समीक्षा
कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, टास्क फोर्स को सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन, सुरक्षा, स्वरूप और प्रशासन से जुड़े व्यापक सुधारों की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है। समिति मौजूदा संस्थागत व्यवस्था और प्रक्रियाओं का अध्ययन करेगी तथा यह देखेगी कि परीक्षा के प्रत्येक चरण को किस तरह अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है। इसका मकसद ऐसी प्रणाली तैयार करना है, जिसमें किसी भी स्तर पर होने वाली गड़बड़ी की संभावना को न्यूनतम किया जा सके और परीक्षा प्रक्रिया पर छात्रों तथा अभिभावकों का भरोसा मजबूत हो।
परीक्षा सुरक्षा का सवाल केवल प्रश्नपत्रों तक सीमित नहीं है। आवेदन प्रक्रिया, अभ्यर्थियों के आंकड़ों की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, प्रश्नपत्रों का वितरण, उत्तर पुस्तिकाओं या डिजिटल उत्तरों का मूल्यांकन और परिणाम जारी करने तक पूरी श्रृंखला में सुरक्षा जरूरी है। समिति इन सभी चरणों को एक साथ देखते हुए सुधार के उपाय सुझाएगी। इसके साथ ही परीक्षा संचालन में शामिल संस्थानों की जवाबदेही और प्रक्रियाओं की निगरानी को भी अधिक मजबूत बनाने पर ध्यान दिए जाने की संभावना है।
तकनीक के साथ बढ़ेगा परीक्षा ढांचा
सरकार ने टास्क फोर्स को उपयुक्त तकनीक के इस्तेमाल के साथ परीक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी दी है। देश में हर साल बड़ी संख्या में विद्यार्थी विभिन्न प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता, उनकी क्षमता, डिजिटल सुविधाएं और सुरक्षा मानकों को मजबूत करना एक बड़ी चुनौती है। समिति इस बात पर भी विचार करेगी कि बढ़ती अभ्यर्थी संख्या के अनुरूप परीक्षा का बुनियादी ढांचा किस तरह विकसित किया जाए।
तकनीकी सुधारों का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बनाना हो सकता है। आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल अभ्यर्थियों की पहचान, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, डेटा सुरक्षा और परीक्षा संचालन की निगरानी में किया जा सकता है। हालांकि, तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा गोपनीयता और साइबर सुरक्षा जैसे सवाल भी महत्वपूर्ण होंगे। इसलिए नई व्यवस्था में तकनीकी सुविधा और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना टास्क फोर्स की प्रमुख चुनौतियों में शामिल रहेगा।
छात्रों की सुविधा और समान अवसर पर भी जोर
सरकार की ओर से जारी जानकारी में परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुलभ और समावेशी बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया है। देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले छात्रों की सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक परिस्थितियां अलग होती हैं। ऐसे में परीक्षा केंद्रों तक पहुंच, डिजिटल सुविधाओं की उपलब्धता और विशेष जरूरत वाले अभ्यर्थियों के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को मजबूत करना परीक्षा सुधार का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। समिति को यह भी देखना होगा कि तकनीकी बदलाव कहीं उन छात्रों के लिए नई बाधा न बन जाएं, जिनके पास पर्याप्त डिजिटल संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
इसके साथ ही छात्र कल्याण को भी नई परीक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाने की बात कही गई है। प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव छात्रों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है, इसलिए परीक्षा प्रक्रिया में अनावश्यक तनाव और असमंजस को कम करना भी जरूरी है। स्पष्ट नियम, समय पर सूचना, पारदर्शी शिकायत निवारण और परिणाम से जुड़ी प्रक्रियाओं की बेहतर जानकारी छात्रों के भरोसे को मजबूत कर सकती है। सरकार की ओर से प्रस्तावित सुधारों में इन पहलुओं को शामिल करना परीक्षा प्रणाली को केवल सुरक्षित ही नहीं, बल्कि अधिक छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
भविष्य के लिए कैसी होगी नई परीक्षा व्यवस्था
सरकार ने उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का व्यापक उद्देश्य एक ऐसी सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली तैयार करना बताया है, जो मजबूत, सुरक्षित, पारदर्शी, समान और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हो। इसके लिए संस्थागत प्रक्रियाओं में सुधार के साथ तकनीक, बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को एक साथ मजबूत करने की जरूरत होगी। नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर पैदा हुए विवादों ने यह स्पष्ट किया है कि परीक्षा व्यवस्था में छोटी-सी खामी भी लाखों छात्रों के भविष्य और पूरी प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है।
अब समिति की सिफारिशें यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी कि देश की सार्वजनिक परीक्षाओं का भविष्य किस दिशा में जाता है। यदि तकनीकी सुधारों के साथ जवाबदेही, पारदर्शिता, डेटा सुरक्षा और छात्र हित को समान महत्व दिया जाता है, तो परीक्षा व्यवस्था में लंबे समय से चली आ रही कई समस्याओं को दूर किया जा सकता है। सरकार के सामने चुनौती केवल नई तकनीक लागू करने की नहीं, बल्कि ऐसी भरोसेमंद व्यवस्था बनाने की है जिसमें मेहनत करने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी को यह विश्वास हो कि परीक्षा निष्पक्ष, सुरक्षित और समान अवसर उपलब्ध कराने वाली है।