नई दिल्ली: भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को सरकार ने 405 रक्षा वस्तुओं के आयात पर चरणबद्ध तरीके से रोक लगाने का फैसला किया। इन वस्तुओं में लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, युद्धपोत, टैंक, पैदल सेना के लड़ाकू वाहनों और मिसाइल प्रणालियों से जुड़े महत्वपूर्ण कलपुर्जे और अतिरिक्त पुर्जे शामिल हैं। इन वस्तुओं को रक्षा मंत्रालय की छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची में शामिल किया गया है। सरकार का उद्देश्य विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना और भारतीय कंपनियों को रक्षा उत्पादन में अधिक अवसर देना है।
एक साथ नहीं लगेगी सभी वस्तुओं पर रोक
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 405 वस्तुओं का आयात मंगलवार से ही पूरी तरह बंद नहीं होगा। इन वस्तुओं के लिए अलग-अलग स्वदेशीकरण समयसीमा तय की गई है। इस अवधि में भारतीय कंपनियों को संबंधित रक्षा उत्पाद और कलपुर्जे विकसित करने होंगे। कंपनियों को सेना की तकनीकी और गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं को भी पूरा करना होगा। जब किसी वस्तु का स्वदेशी विकल्प तैयार हो जाएगा और निर्धारित समयसीमा प्रभावी होगी, तब उसकी खरीद भारतीय निर्माताओं से की जाएगी। यानी सरकार विदेशी आयात को अचानक रोकने के बजाय चरणबद्ध तरीके से घरेलू उत्पादन को मजबूत करेगी।
छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची में 405 वस्तुएं
रक्षा मंत्रालय की छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची में कुल 405 वस्तुओं को शामिल किया गया है। इनमें से 389 वस्तुएं रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से जुड़ी हैं, जबकि 16 वस्तुएं भारतीय तटरक्षक बल से संबंधित हैं। सूची में लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, टैंक, पैदल सेना के लड़ाकू वाहन, मिसाइल, रडार, सोनार और युद्धपोतों से जुड़े उपकरण शामिल हैं। कई वस्तुएं ऐसी हैं जो बड़े रक्षा प्लेटफॉर्म के संचालन और रखरखाव के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। सरकार के अनुसार इन वस्तुओं के स्वदेशीकरण से भारतीय उद्योग के लिए करीब 3,070 करोड़ रुपये के कारोबारी अवसर पैदा हो सकते हैं।
लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर के कलपुर्जे भी शामिल
नई सूची में सुखोई-30 एमकेआई, हल्का लड़ाकू विमान, उन्नत हल्का हेलीकॉप्टर और हल्का उपयोगिता हेलीकॉप्टर से जुड़े उपकरण शामिल हैं। इसके अलावा एएल-31एफपी इंजन से संबंधित कलपुर्जों और प्रणालियों को भी सूची में जगह दी गई है। इन वस्तुओं का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि इनकी जरूरत केवल नए विमान तैयार करने में ही नहीं, बल्कि मौजूदा विमानों को लंबे समय तक परिचालन में बनाए रखने के लिए भी होती है। स्थानीय स्तर पर इनका उत्पादन होने से रखरखाव के दौरान विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम होगी। इससे भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
टी-72, टी-90 टैंक और बीएमपी-2 भी दायरे में
स्वदेशीकरण की नई सूची में टी-72 और टी-90 टैंकों से जुड़े उपकरण तथा बीएमपी-2 पैदल सेना लड़ाकू वाहन से संबंधित कलपुर्जे भी शामिल हैं। इन सैन्य वाहनों के रखरखाव और मरम्मत के लिए बड़ी संख्या में अतिरिक्त पुर्जों की जरूरत होती है। यदि इन पुर्जों का उत्पादन देश में ही होने लगेगा तो सेना को विदेशी आपूर्ति व्यवस्था पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। इससे रखरखाव के समय में कमी आने की संभावना है। साथ ही युद्धक वाहनों की उपलब्धता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
मिसाइल, गोला-बारूद और महत्वपूर्ण प्रणालियों पर जोर
नई सूची में कोंकर्स-एम, इनवार और एमआरएसएएम जैसी मिसाइल प्रणालियों से संबंधित वस्तुएं भी शामिल हैं। इसके अलावा उच्च विस्फोटक टैंक रोधी गोला-बारूद समेत कई महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों को स्वदेशीकरण के दायरे में लाया गया है। इन प्रणालियों के लिए जरूरी कलपुर्जों और उपकरणों का घरेलू उत्पादन रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत कर सकता है। इससे विदेशी स्रोतों से आने वाली आपूर्ति में किसी तरह की बाधा होने पर भारतीय सशस्त्र बलों को अधिक आत्मनिर्भर विकल्प मिल सकेगा। रक्षा क्षेत्र में लंबे समय तक रणनीतिक आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रडार, सोनार और युद्धपोतों के उपकरण भी शामिल
स्वदेशीकरण केवल हथियारों और सैन्य वाहनों तक सीमित नहीं है। सूची में रडार, सोनार, अग्नि नियंत्रण प्रणाली, उपग्रह संचार प्रणाली और युद्धपोतों से जुड़े उपकरण भी शामिल किए गए हैं। ये प्रणालियां सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, भले ही ये लड़ाकू विमान या टैंक की तरह सीधे नजर नहीं आतीं। इनका घरेलू उत्पादन बढ़ने से रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और उच्च तकनीक वाले विनिर्माण क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे देश में महत्वपूर्ण रक्षा तकनीक विकसित करने की क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है।
विदेशी निर्भरता कम करना मुख्य लक्ष्य
भारत लंबे समय से अपनी सैन्य जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहा है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में देश में रक्षा उत्पादन तेजी से बढ़ा है, लेकिन कई विशेष कलपुर्जे और प्रणालियां अभी भी विदेशों से मंगाई जाती हैं। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट या अंतरराष्ट्रीय तनाव की स्थिति में ऐसी निर्भरता चुनौती बन सकती है। सरकार का लक्ष्य अब महत्वपूर्ण रक्षा वस्तुओं के लिए देश के भीतर भरोसेमंद आपूर्ति व्यवस्था तैयार करना है। इससे न केवल रक्षा आयात पर खर्च कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि सेना के लिए जरूरी उपकरणों की उपलब्धता भी अधिक सुरक्षित होगी।
भारतीय उद्योग को 3,070 करोड़ रुपये के अवसर
सरकार का अनुमान है कि छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची में शामिल 405 वस्तुएं भारतीय उद्योग के लिए करीब 3,070 करोड़ रुपये का कारोबारी अवसर पैदा कर सकती हैं। विदेशी कंपनियों से होने वाली खरीद धीरे-धीरे भारतीय निर्माताओं की ओर स्थानांतरित होगी। इससे एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, सटीक इंजीनियरिंग और रक्षा कलपुर्जा निर्माण से जुड़ी कंपनियों को फायदा मिल सकता है। छोटे और मध्यम उद्योगों तथा नए उद्यमों के लिए भी रक्षा क्षेत्र में प्रवेश के अवसर बढ़ेंगे। हालांकि घरेलू कंपनियों को सेना की सख्त तकनीकी और गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना होगा।
भारतीय कंपनियां कैसे विकसित करेंगी रक्षा वस्तुएं?
सरकार स्वदेशीकरण के लिए मेक प्रक्रिया और रक्षा संगठनों के आंतरिक विकास जैसे माध्यमों का इस्तेमाल करेगी। भारतीय उद्योग को इन वस्तुओं के विकास और निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। किसी वस्तु को स्वदेशी सूची में शामिल करने का अर्थ यह नहीं है कि उसका आयात तुरंत बंद कर दिया जाएगा। पहले कंपनियों को उत्पाद विकसित करना होगा और निर्धारित तकनीकी मानकों को पूरा करना होगा। इसके बाद उत्पाद की विश्वसनीयता और प्रदर्शन को जांचा जाएगा। स्वदेशी क्षमता स्थापित होने के बाद खरीद भारतीय निर्माताओं की ओर स्थानांतरित की जाएगी।
श्रीजन पोर्टल से भारतीय कंपनियों को अवसर
रक्षा मंत्रालय ने अगस्त 2020 में श्रीजन रक्षा पोर्टल की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य भारतीय कंपनियों को उन रक्षा उत्पादों की जानकारी उपलब्ध कराना है, जिन्हें देश में विकसित और निर्मित किया जा सकता है। रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और सशस्त्र बलों के मुख्यालय इस पोर्टल के माध्यम से आयातित वस्तुओं की पहचान कर उन्हें भारतीय उद्योग के लिए उपलब्ध कराते हैं। जून 2026 तक श्रीजन पोर्टल के माध्यम से 33,000 से अधिक रक्षा वस्तुओं को स्वदेशीकरण के लिए उपलब्ध कराया जा चुका था। इनमें पहली पांच सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों की 5,012 वस्तुएं भी शामिल हैं।
अब तक 15,700 से ज्यादा वस्तुओं का स्वदेशीकरण
सरकार के अनुसार देश में अब तक 15,700 से अधिक रक्षा वस्तुओं का सफलतापूर्वक स्वदेशीकरण किया जा चुका है। पिछले पांच वर्षों में इससे करीब 9,000 करोड़ रुपये का आयात प्रतिस्थापन हुआ है। इसके अलावा मार्च 2026 तक रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने घरेलू विक्रेताओं के साथ करीब 10,000 करोड़ रुपये के खरीद आदेश दिए हैं। इसमें आंतरिक उत्पादन भी शामिल है। इससे संकेत मिलता है कि रक्षा क्षेत्र में घरेलू आपूर्ति श्रृंखला लगातार मजबूत हो रही है। छठी सूची इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।
आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र की ओर बड़ा कदम
405 रक्षा वस्तुओं के चरणबद्ध स्वदेशीकरण से भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को नई गति मिलने की उम्मीद है। इसका असर केवल आयात घटाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश में नई तकनीक, अनुसंधान, विनिर्माण और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। घरेलू कंपनियों की क्षमता बढ़ने से महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों के लिए विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता कम होगी। सरकार की यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले वर्षों में इसके जरिए भारत के रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने पर भी जोर रहेगा।