नई दिल्ली. देश की राजधानी और आसपास के इलाकों में प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने विशेष रेल परिवहन व्यवस्था का सहारा लिया है। महाराष्ट्र के नासिक से करीब 453.65 टन प्याज लेकर पहली ‘कांदा एक्सप्रेस’ शुक्रवार सुबह दिल्ली पहुंची। इस विशेष रेल रैक में कुल 21 डिब्बों के माध्यम से प्याज की खेप राष्ट्रीय राजधानी तक पहुंचाई गई। सरकार का उद्देश्य बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाना और आपूर्ति की कमी के कारण कीमतों पर पड़ रहे दबाव को कम करना है। दिल्ली पहुंची यह खेप मूल्य स्थिरीकरण के लिए शुरू किए गए व्यापक प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है।
दिल्ली-एनसीआर में ₹35 प्रति किलो की रियायती दर पर बिक्री
उपभोक्ता मामले सचिव निधि खरे के अनुसार, नासिक से लाई गई प्याज की इस खेप को दिल्ली-एनसीआर में ₹35 प्रति किलो की रियायती दर पर बेचा जाएगा। सरकार का मानना है कि रियायती दर पर प्याज उपलब्ध कराने से आम उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और खुले बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है। दिल्ली के अलावा उपलब्ध स्टॉक का एक हिस्सा चंडीगढ़, लुधियाना और जम्मू जैसे नजदीकी शहरों में भी भेजे जाने की योजना है। इससे उत्तर भारत के कई प्रमुख उपभोक्ता बाजारों में प्याज की आपूर्ति बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
केंद्र के पास 1.21 लाख टन से अधिक का बफर स्टॉक
केंद्र सरकार के पास मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत वर्तमान में करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक उपलब्ध है। इस भंडार का उपयोग उन क्षेत्रों में आपूर्ति बढ़ाने के लिए किया जा रहा है, जहां खुदरा कीमतों में तेजी देखी जा रही है। बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारने के साथ-साथ सरकार ने परिवहन व्यवस्था को भी तेज करने का फैसला किया है, ताकि उत्पादक क्षेत्रों से बड़े उपभोक्ता बाजारों तक माल कम समय में पहुंच सके। रेल के माध्यम से बड़ी मात्रा में प्याज भेजने की व्यवस्था से सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद है।
चेन्नई के लिए अगली रैक, अन्य शहरों तक भी पहुंचेगी आपूर्ति
दिल्ली के बाद सरकार दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के प्रमुख बाजारों तक भी प्याज पहुंचाने की तैयारी कर रही है। चेन्नई के लिए एक विशेष ‘कांदा एक्सप्रेस’ रैक को लोड करने की योजना बनाई गई है। इसके बाद मदुरै, एर्नाकुलम और गुवाहाटी के लिए भी क्रमशः प्याज की खेप रेल मार्ग से भेजी जाएगी। सरकार की रणनीति विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धता बढ़ाकर आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बनाने की है। अलग-अलग शहरों तक विशेष रेल रैक के जरिए प्याज पहुंचाने से उन बाजारों में कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना जताई जा रही है।
दिल्ली में 88% बढ़ चुकी है खुदरा कीमत
उपभोक्ता मामले मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में गुरुवार को प्याज की खुदरा कीमत बढ़कर ₹62 प्रति किलो तक पहुंच गई, जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में इसकी कीमत करीब ₹33 प्रति किलो थी। इस तरह सालाना आधार पर खुदरा कीमतों में लगभग 88% की वृद्धि दर्ज की गई है। कीमतों में इस तेज उछाल ने उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर असर डाला है, जिसके बाद सरकार ने बफर स्टॉक जारी करने और प्रमुख शहरों तक आपूर्ति बढ़ाने के कदम तेज किए हैं।
एक सप्ताह में कीमतों पर असर की उम्मीद
सरकार का अनुमान है कि बफर स्टॉक से प्याज की लगातार आपूर्ति और विभिन्न शहरों में रियायती बिक्री का असर आने वाले लगभग 1 सप्ताह के भीतर दिल्ली के खुदरा बाजार पर दिखाई दे सकता है। हालांकि कीमतों की वास्तविक दिशा मांग, स्थानीय आपूर्ति, परिवहन लागत और बाजार की परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगी। फिलहाल ‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिए नासिक से दिल्ली तक 453.65 टन प्याज पहुंचना सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत बढ़ती कीमतों के बीच उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए आपूर्ति व्यवस्था को तेज किया जा रहा है।
महंगाई पर नियंत्रण के लिए आपूर्ति श्रृंखला पर जोर
प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव अक्सर आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ सरकारों के लिए भी बड़ी चुनौती बनता रहा है। ऐसे में बफर स्टॉक का उपयोग, रियायती बिक्री और विशेष रेल रैक के माध्यम से तेजी से आपूर्ति पहुंचाने की रणनीति को मूल्य नियंत्रण के महत्वपूर्ण उपाय के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में चेन्नई, मदुरै, एर्नाकुलम और गुवाहाटी जैसे शहरों तक प्याज की खेप पहुंचने के बाद यह स्पष्ट होगा कि बढ़ी हुई आपूर्ति खुदरा बाजार में किस हद तक कीमतों को नीचे लाने में सफल होती है।