कंगना रनौत और योगगुरु स्वामी रामदेव के बीच इस महीने की शुरुआत में तीखी बयानबाजी देखने को मिली थी। विवाद की शुरुआत कंगना की जेनरेशन जेड यानी नई युवा पीढ़ी को लेकर की गई विवादित टिप्पणी से हुई थी। कंगना ने एक कार्यक्रम में युवा प्रदर्शनकारियों को लेकर ‘गटर जेनरेशन’ जैसी टिप्पणी की थी, जिस पर रामदेव ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे बिगड़े हुए मन की अभिव्यक्ति बताया था। उन्होंने कथित तौर पर कंगना की राजनीतिक पार्टी से भी इस तरह के बयान पर ध्यान देने की अपील की थी।
रामदेव की टिप्पणी के बाद कंगना ने भी पलटवार करने में देर नहीं की थी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से रामदेव को उनके खिलाफ चल रहे उच्चतम न्यायालय से जुड़े मामले की याद दिलाई थी। इसके बाद दोनों के बीच बयानबाजी ने राजनीतिक और सोशल मीडिया हलकों में काफी चर्चा बटोरी। हालांकि, अब रक्षाबंधन के मौके पर सामने आए रामदेव के नए रुख ने इस विवाद को समाप्त करने की दिशा में एक अलग संदेश दिया है।
बाबा रामदेव ने विवाद को संवाद में बदलने की पहल की
रक्षाबंधन के अवसर पर बाबा रामदेव ने पत्रकारों से बातचीत में कंगना के साथ जारी मतभेद को आगे न बढ़ाने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि विवाद को बढ़ाने के बजाय उसे बातचीत में बदलना चाहिए। रामदेव ने यह भी बताया कि वह कंगना के लिए राखी के अवसर पर मिठाई और उपहार भेजना चाहते हैं तथा उन्हें फोन करके शुभकामनाएं देंगे। उनकी इस पहल में सार्वजनिक विवाद को पारिवारिक रिश्ते और संवाद के माध्यम से समाप्त करने का संदेश दिखाई दिया।
रामदेव ने व्यापक रूप से भी कहा कि देश में किसी भी कारण से नफरत नहीं होनी चाहिए और लोगों के बीच शत्रुता का भाव नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी मतभेद या विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह मामले को और आगे बढ़ाना नहीं चाहते। रामदेव का यह रुख पहले की तीखी बयानबाजी की तुलना में काफी नरम था और इसी के बाद कंगना की प्रतिक्रिया सामने आई।
कंगना ने भाई का प्रेम बताकर स्वीकार किया इशारा
कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए रामदेव की सुलह की पहल पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने रामदेव का वह वीडियो साझा किया, जिसमें योगगुरु विवाद को खत्म कर बातचीत का रास्ता अपनाने की बात कर रहे थे। इसके साथ कंगना ने लिखा कि त्योहार का दिन भूल-चूक माफ करने के लिए होता है और उनके भाई बाबा रामदेव ने सही कहा है कि विवाद नहीं, बल्कि संवाद होना चाहिए। इस तरह उन्होंने सार्वजनिक रूप से रामदेव के संदेश को सकारात्मक रूप में स्वीकार किया।
कंगना ने आगे कहा कि रक्षाबंधन के दिन वह रामदेव की मिठाई और बड़े भाई का प्रेम दोनों स्वीकार करती हैं। उन्होंने इसके लिए रामदेव को धन्यवाद दिया और उनके लंबे जीवन की कामना भी की। कंगना की यह प्रतिक्रिया इस लिहाज से महत्वपूर्ण रही कि उन्होंने पुराने विवाद को दोहराने के बजाय सुलह के संकेत को स्वीकार करने का रास्ता चुना। उनके बयान से यह संदेश गया कि दोनों पक्ष अब सार्वजनिक टकराव को आगे बढ़ाने के इच्छुक नहीं हैं।
पुराने विवाद पर लग सकता है विराम
कंगना और रामदेव के बीच विवाद ने सोशल मीडिया पर भी काफी ध्यान आकर्षित किया था, क्योंकि दोनों ही सार्वजनिक जीवन में प्रभावशाली चेहरे हैं। एक ओर कंगना फिल्म जगत के साथ-साथ राजनीति में सक्रिय हैं, वहीं रामदेव योग और पतंजलि से जुड़े अपने सार्वजनिक प्रभाव के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में दोनों के बीच हुई बयानबाजी सामान्य व्यक्तिगत विवाद से आगे बढ़कर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गई थी। रक्षाबंधन के मौके पर दोनों की ओर से आए नरम संकेत अब इस प्रकरण को शांत करने की संभावना पैदा करते हैं।
हालांकि, दोनों के बीच मतभेद किस स्तर तक पूरी तरह समाप्त हुए हैं, इसका आकलन भविष्य की सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं से ही किया जा सकेगा। फिलहाल कंगना ने रामदेव के भाईचारे वाले संदेश को स्वीकार कर लिया है और रामदेव ने भी विवाद को बढ़ाने से इनकार किया है। ऐसे में रक्षाबंधन दोनों के लिए सार्वजनिक मतभेद से पीछे हटने और संवाद का रास्ता अपनाने का अवसर बनता दिख रहा है।
‘विवाद नहीं, संवाद’ से आया नया संदेश
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे प्रमुख संदेश दोनों पक्षों की ओर से सामने आया ‘संवाद’ का विचार है। रामदेव ने मतभेदों को बातचीत के माध्यम से सुलझाने की बात कही, जबकि कंगना ने रक्षाबंधन के भावनात्मक संदर्भ में उनकी पहल को स्वीकार किया। त्योहार के अवसर पर सामने आया यह मेल-मिलाप सार्वजनिक जीवन में तीखी बयानबाजी के बाद रिश्तों को सामान्य करने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।
कंगना का ‘सब भूल-चूक माफ’ वाला संदेश और रामदेव की सुलह की पहल फिलहाल दोनों के बीच चल रहे सार्वजनिक विवाद का नया अध्याय है। इससे पहले जहां बयान एक-दूसरे पर पलटवार और आरोपों की दिशा में जा रहे थे, वहीं अब दोनों ने रिश्ते को भाई-बहन के स्नेह और बातचीत के जरिए देखने का संकेत दिया है। आने वाले दिनों में यदि दोनों इस रुख पर कायम रहते हैं, तो हालिया विवाद को यहीं समाप्त माना जा सकता है।