कर्नाटक - कर्नाटक में नंदिनी दूध की कीमत बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। राज्य की सहकारी दुग्ध उत्पादक यूनियनों ने दूध की खरीद और खुदरा कीमत में 8 से 10 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की मांग की है। यूनियनों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात कर बढ़ती उत्पादन लागत और डेयरी किसानों की आर्थिक परेशानियों का हवाला देते हुए मूल्य संशोधन की मांग रखी। हालांकि, अभी सरकार ने कीमत बढ़ाने का कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।
CM शिवकुमार ने मांगा पूरा हिसाब
प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अधिकारियों से नंदिनी दूध की कीमत बढ़ाने के प्रस्ताव पर विस्तृत आंकड़े जुटाने को कहा है। इसमें पिछले 10 वर्षों में पशु चारे की कीमतों में हुई बढ़ोतरी, एक लीटर दूध के उत्पादन की लागत, अलग-अलग जिलों में दूध का उत्पादन और बिक्री तथा सहकारी संघों द्वारा की जा रही दूध खरीद की जानकारी शामिल है। मुख्यमंत्री ने पड़ोसी राज्यों में दूध की खरीद कीमत और बिक्री दर से जुड़े आंकड़े भी मांगे हैं, ताकि कर्नाटक की स्थिति की तुलना की जा सके।
चारा, दवाइयां और रखरखाव का बढ़ा खर्च
दूध यूनियनों का कहना है कि पिछले कुछ समय में पशु चारा, हरा चारा, पशु चिकित्सा, दवाइयों और डेयरी संचालन से जुड़े खर्च में बढ़ोतरी हुई है। राज्य में सूखे और चारे की उपलब्धता प्रभावित होने से दूध उत्पादन और खरीद पर भी असर पड़ा है। दूध उत्पादकों के मुताबिक, बढ़ती लागत के मुकाबले किसानों को मिलने वाली कीमत में पर्याप्त बदलाव नहीं हुआ है। इसी आधार पर खरीद कीमत बढ़ाने की मांग की जा रही है।
पड़ोसी राज्यों की कीमतों का भी दिया हवाला
दूध यूनियनों की ओर से बताया गया कि कर्नाटक में किसानों से दूध की खरीद करीब 35 रुपये प्रति लीटर की दर से होती है। इसके मुकाबले आंध्र प्रदेश में 41.50 रुपये, केरल में 41.80 रुपये, महाराष्ट्र में 41 रुपये और तमिलनाडु में 42.24 रुपये प्रति लीटर की खरीद दर का हवाला दिया गया है। ये आंकड़े यूनियन प्रतिनिधियों की ओर से रखे गए हैं। यूनियनों का तर्क है कि खरीद और बिक्री दोनों कीमतों में संशोधन से डेयरी किसानों को बढ़ती लागत के बीच राहत मिल सकती है।
डेढ़ साल से कीमत नहीं बढ़ने का दावा
दुग्ध यूनियनों का कहना है कि कर्नाटक में करीब डेढ़ साल से दूध की कीमत में बढ़ोतरी नहीं की गई है। इससे पहले सितंबर में भी दूध उत्पादकों ने कीमत बढ़ाने की मांग को लेकर सरकार के सामने अपनी बात रखी थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछली कीमत बढ़ोतरी अप्रैल 2025 में हुई थी। अब एक बार फिर यूनियनों ने ₹8 से ₹10 प्रति लीटर की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है।
ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा असर?
अगर सरकार यूनियनों की मांग को मंजूरी देती है, तो नंदिनी दूध की कीमत बढ़ने से कर्नाटक में सीधे उपभोक्ताओं पर असर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह सिर्फ मांग है और सरकार ने अभी अंतिम दर या बढ़ोतरी की तारीख घोषित नहीं की है। मुख्यमंत्री द्वारा मांगे गए आंकड़ों के आधार पर प्रस्ताव की समीक्षा के बाद ही इस पर फैसला होने की उम्मीद है।
ऐसे में कर्नाटक के लाखों दूध उपभोक्ताओं की नजर अब सरकार के अगले फैसले पर है कि नंदिनी दूध की कीमत में वास्तव में कितनी बढ़ोतरी की जाती है या यूनियनों की मांग पर कोई दूसरा रास्ता निकाला जाता है।