राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत इन दिनों अमेरिका के दौरे पर हैं, जहां उन्होंने भारतीय मूल के उद्योगपतियों, निवेशकों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े पेशेवरों के साथ संवाद किया। इसी क्रम में न्यूयॉर्क में एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें अलग-अलग उद्योगों से जुड़े लोगों ने भाग लिया। बैठक के दौरान भारत की आर्थिक और तकनीकी प्रगति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। भारतीय-अमेरिकी उद्यम पूंजी निवेशक आशा जडेजा मोटवानी भी इस बैठक का हिस्सा थीं और उन्होंने मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा किए।
मोटवानी के अनुसार, बातचीत के दौरान भागवत ने भारत के भविष्य से जुड़े कई विषयों पर अपने विचार रखे। चर्चा केवल सामाजिक या सांस्कृतिक मुद्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अंतरिक्ष, दूरसंचार, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों पर भी बातचीत हुई। इससे यह संकेत मिलता है कि बैठक में भारत की दीर्घकालिक तकनीकी और आर्थिक दिशा को लेकर व्यापक विमर्श हुआ। मोटवानी ने इस संवाद को विभिन्न उद्योगों से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण अनुभव बताया।
युवाओं की क्षमता पर अटूट भरोसे का दावा
बैठक के बाद आशा जडेजा मोटवानी ने मोहन भागवत के बारे में कहा कि उनका भारतीय युवाओं पर “अटूट भरोसा” है। उनके अनुसार, भागवत मानते हैं कि देश की युवा पीढ़ी भारत को आगे ले जाने और औपनिवेशिक दौर से बची संरचनाओं को पीछे छोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। मोटवानी ने इस दृष्टिकोण को भारत के भविष्य से जोड़ते हुए भागवत की सोच को रेखांकित किया। उनके बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि बातचीत में युवा शक्ति और देश के भविष्य को महत्वपूर्ण स्थान मिला।
भारत में तेजी से बढ़ती युवा आबादी को आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार और उद्यमिता की दृष्टि से महत्वपूर्ण शक्ति माना जाता है। ऐसे में युवाओं की भूमिका को लेकर होने वाली चर्चाएं रोजगार, कौशल, शिक्षा और नई तकनीकों से भी जुड़ती हैं। बैठक में तकनीक और अर्थव्यवस्था से संबंधित विषयों पर चर्चा होने के कारण युवाओं की भागीदारी और भविष्य की संभावनाओं का संदर्भ भी महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि, मोटवानी द्वारा साझा किए गए विचार उनके बैठक संबंधी व्यक्तिगत आकलन और अनुभव पर आधारित हैं।
भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर भी चर्चा
आशा जडेजा मोटवानी ने मोहन भागवत को भारत और अमेरिका के संबंधों में विश्वास रखने वाला व्यक्ति भी बताया। उनके अनुसार, भागवत दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों के “सच्चे समर्थक” हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत और अमेरिका के बीच तकनीक, निवेश, रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग लगातार चर्चा में रहता है। भारतीय मूल के अमेरिकी कारोबारी समुदाय की भूमिका भी दोनों देशों के आर्थिक और तकनीकी संबंधों में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
बैठक में उद्योग जगत से जुड़े लोगों की मौजूदगी ने भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी के व्यापक संदर्भ को भी सामने रखा। दूरसंचार और अंतरिक्ष से लेकर ऊर्जा तथा अत्याधुनिक तकनीक तक कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ी हैं। मोटवानी ने बैठक को इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा और भागवत के विचारों को भारत की तकनीकी तथा आर्थिक यात्रा से जोड़कर पेश किया। हालांकि, बैठक में लिए गए किसी औपचारिक नीतिगत निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।
अंतरिक्ष और क्वांटम कंप्यूटिंग तक पहुंची बातचीत
मोटवानी ने बताया कि भागवत ने अंतरिक्ष और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे उभरते क्षेत्रों पर भी चर्चा की। भारत इन दोनों क्षेत्रों में अपनी क्षमता बढ़ाने पर लगातार जोर दे रहा है। अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों और स्टार्टअप की बढ़ती भागीदारी के साथ-साथ क्वांटम कंप्यूटिंग को भविष्य की रणनीतिक तकनीक के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में इन विषयों का किसी उद्योग जगत की बैठक में चर्चा का हिस्सा बनना भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं की ओर संकेत करता है।
बैठक में दूरसंचार, स्वच्छ ऊर्जा, पारंपरिक ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और अन्य उद्योगों से जुड़े लोगों ने भी सवाल किए। मोटवानी ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों के प्रतिभागियों ने महत्वपूर्ण प्रश्न रखे और भागवत ने उन पर अपने विचार साझा किए। इससे बैठक का दायरा काफी व्यापक रहा। खास तौर पर अंतरिक्ष और क्वांटम तकनीक जैसे क्षेत्रों का उल्लेख यह बताता है कि बातचीत में भारत के वर्तमान आर्थिक मुद्दों के साथ भविष्य की प्रौद्योगिकी को भी जगह मिली।
संघ के शताब्दी वर्ष में वैश्विक संपर्क अभियान
मोहन भागवत का अमेरिका दौरा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़े वैश्विक संपर्क कार्यक्रम का हिस्सा बताया गया है। संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भारतीय समुदाय और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अमेरिका में भी भागवत के कार्यक्रमों को इसी व्यापक संपर्क अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। न्यूयॉर्क में उद्योग जगत के लोगों के साथ हुई बैठक इसी क्रम का हिस्सा रही।
अमेरिका में भागवत की मौजूदगी के बीच उनके दौरे को लेकर अलग-अलग तरह की राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। ऐसे माहौल में उद्योग जगत से जुड़े भारतीय-अमेरिकी लोगों के साथ उनकी बैठक और उस पर सामने आई सकारात्मक प्रतिक्रिया अलग महत्व रखती है। मोटवानी ने अपने अनुभव के आधार पर भागवत के युवाओं, तकनीक और भारत के भविष्य को लेकर विचारों की प्रशंसा की है। फिलहाल यह मुलाकात मुख्य रूप से संवाद और विचार-विनिमय के रूप में सामने आई है, जबकि इसके दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन आगे किया जाएगा।