नई दिल्ली. देशभर में प्याज की कीमतों में लगातार आ रही गिरावट के बीच केंद्र सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार अब किसानों से 12.35 रुपए प्रति किलोग्राम यानी 1,235 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्याज खरीदेगी। इस फैसले की घोषणा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र के सतारा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की। सरकार का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य किसानों को बाजार में हो रहे नुकसान से बचाना और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है।
पश्चिम एशिया संकट का पड़ा सीधा असर
केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अस्थिरता का असर भारत के प्याज निर्यात पर पड़ा है। निर्यात प्रभावित होने के कारण घरेलू बाजार में प्याज की आवक बढ़ गई, जिससे कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की गई। इसका सबसे बड़ा असर किसानों की आय पर पड़ा है। कई मंडियों में किसानों को लागत से भी कम कीमत पर प्याज बेचने की मजबूरी का सामना करना पड़ रहा था।
नाफेड को दिए गए खरीद के निर्देश
सरकार ने इस फैसले के साथ ही भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ यानी नाफेड को खरीद प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। नाफेड अब तय दर पर किसानों से प्याज खरीदेगा। सरकार का मानना है कि इससे बाजार में संतुलन बनेगा और किसानों को तत्काल राहत मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम किसानों की आय को स्थिर रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किसानों के संगठन फैसले से पूरी तरह संतुष्ट नहीं
हालांकि सरकार के इस फैसले के बावजूद किसान संगठनों ने इसे अपर्याप्त बताया है। महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ का कहना है कि 1,235 रुपए प्रति क्विंटल की दर उत्पादन लागत के मुकाबले काफी कम है। संगठन का दावा है कि किसानों को खेती, भंडारण और परिवहन पर इससे कहीं अधिक खर्च करना पड़ता है, ऐसे में यह खरीद दर उन्हें पर्याप्त राहत नहीं दे पाएगी।
समर्थन मूल्य बढ़ाने की उठी मांग
किसान संगठनों ने सरकार से प्याज के लिए कम से कम 3,000 रुपए प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि तभी किसानों को वास्तविक आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी। इसके साथ ही हाल के महीनों में कम दामों पर प्याज बेच चुके किसानों को मुआवजा देने की मांग भी तेज हो गई है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन शुरू किया जा सकता है।
महाराष्ट्र की राजनीति में भी बढ़ी हलचल
यह फैसला ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र में प्याज उत्पादक किसान लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं। सतारा में आयोजित कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद रहे। माना जा रहा है कि सरकार किसानों की नाराजगी को कम करने के लिए जल्द और भी राहतकारी कदम उठा सकती है। प्याज उत्पादक क्षेत्रों में इस फैसले को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है।
किसानों की नजर अब अगले फैसलों पर
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम तत्काल राहत तो देगा, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए निर्यात नीति, भंडारण व्यवस्था और न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसे मुद्दों पर व्यापक नीति की जरूरत है। फिलहाल किसानों की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार भविष्य में उनकी आय सुरक्षित करने के लिए और क्या कदम उठाती है।