अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्ध और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता का असर अब मध्यप्रदेश के पन्ना के प्रसिद्ध हीरा कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। बाजार में हीरे की मांग घटने और कीमतों में करीब 60 प्रतिशत तक गिरावट आने के कारण 24 मार्च को प्रस्तावित हीरा नीलामी को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। कारोबारियों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय हालात के चलते बड़े खरीदार निवेश से बच रहे हैं, जिससे पन्ना के हीरा बाजार में मंदी गहराती जा रही है।
कीमतों में भारी गिरावट, आधे रह गए हीरे के दाम
पन्ना के हीरा व्यापारियों के अनुसार पहले जो 1 कैरेट उज्ज्वल किस्म का तैयार हीरा 2 से 3 लाख रुपये तक बिक जाता था, वही अब केवल 80 हजार से 1 लाख रुपये तक ही खरीदार मिल रहे हैं। इस प्रकार बाजार में लगभग 60 प्रतिशत तक की गिरावट देखी जा रही है। हीरा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में जो कीमतें मिल रही हैं, वे लगभग 2005 से 2007 के दौर के बराबर हैं। ऐसे में घाटे की स्थिति में नीलामी आयोजित करना व्यावहारिक नहीं माना जा रहा है।
नीलामी के इंतजार में सैकड़ों हीरे, मंझगव परियोजना भी प्रभावित
पन्ना हीरा कार्यालय में बड़ी संख्या में हीरे नीलामी के इंतजार में पड़े हुए हैं। यहां 5 कैरेट, 7 कैरेट और 10 कैरेट तक के बड़े उज्ज्वल किस्म के हीरे भी जमा हैं, जिनके तुअदार (पट्टाधारक) पिछले दो वर्षों से इनके बिकने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं मध्यप्रदेश की एकमात्र यांत्रिक हीरा खनन परियोजना मंझगव, जिसे एनएमडीसी संचालित करती है, वहां भी करीब 10 हजार कैरेट हीरे बिक्री के इंतजार में पड़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं होते, तब तक हीरा बाजार में तेजी लौटना मुश्किल है।
इनका कहना
खनिज अधिकारी पन्ना रवि पटेल ने बताया कि वर्तमान में बाजार में हीरे के दामों को लेकर आर्थिक अस्थिरता बनी हुई है, इसलिए नीलामी को फिलहाल स्थगित किया गया है क्योंकि ऐसी स्थिति में अच्छे दाम मिलना संभव नहीं है। पन्ना डायमंड एसोसिएशन के सचिव सतेंद्र जड़िया का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय युद्ध के कारण बाजार में उथल-पुथल मची हुई है, जिसके चलते बड़े निवेशक हीरे में पैसा लगाने से बच रहे हैं। एसोसिएशन के सदस्य गगन जड़िया के अनुसार रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अब इजरायल और ईरान के तनाव ने भी हीरा व्यापार को प्रभावित किया है। कीमतें कम होने से हीरा उत्खनन करने वाले लोगों पर भी इसका असर पड़ेगा, क्योंकि लागत अधिक और बाजार मूल्य कम मिल रहा है।
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