नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोरोना काल में स्थापित 'पीएम केयर्स फंड' (PM CARES Fund) की वित्त वर्ष 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट जारी कर दी गई है। आधिकारिक वेबसाइट पर साझा किए गए विवरण के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक पीएम केयर्स फंड का कुल कॉर्पस बढ़कर 8,452.07 करोड़ रुपये पहुंच गया है।इस विशाल कोष में से लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा यानी 7,846.65 करोड़ रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में जमा रखे गए हैं। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान पूरे फंड से मात्र 87.85 लाख रुपये का ही भुगतान किया गया है, जो कुल उपलब्ध कोष का बेहद मामूली हिस्सा है।
दान से ज्यादा बैंक ब्याज से हुई कमाई
ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 की शुरुआत में पीएम केयर्स फंड के बैंक खातों में 7,173.03 करोड़ रुपये मौजूद थे। इस दौरान फंड को देश के भीतर से 479.04 करोड़ रुपये और विदेशी स्रोतों से 92.83 लाख रुपये का दान प्राप्त हुआ।दिलचस्प बात यह है कि फंड में रखी गई विशाल राशि से बैंक ब्याज के रूप में 475.14 करोड़ रुपये (एफडी से 469.37 करोड़ रुपये और बचत खाते से 5.77 करोड़ रुपये) की आय प्राप्त हुई। यानी फंड ने ताजा घरेलू चंदे के लगभग बराबर राशि केवल ब्याज से कमाई है।

एजेंसियों से 324 करोड़ रुपये की वापसी पर उठे सवाल
रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, डीआरडीओ (DRDO) और एनएचएआई (NHAI) जैसी कार्यान्वयन एजेंसियों (Implementing Agencies) से 324.66 करोड़ रुपये की राशि रिफंड के रूप में वापस पीएम केयर्स फंड में आई है। हालांकि, ऑडिट रिपोर्ट में इस बात का स्पष्ट खुलासा नहीं किया गया है कि यह रिफंड किन योजनाओं के तहत या किस कारण से वापस आया है।
खर्च और पारदर्शिता पर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जताई चिंता
वर्ष 2024-25 के दौरान किए गए कुल 87.85 लाख रुपये के खर्च में से लगभग पूरी राशि (87.84 लाख रुपये) 'पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन स्कीम' पर खर्च की गई है।इतने बड़े कोष के बावजूद न्यूनतम खर्च और रिपोर्ट में विस्तृत नोट्स की कमी को लेकर पारदर्शी कार्यकर्ताओं और विपक्ष की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। एक्टिविस्ट अंजली भारद्वाज और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने सवाल उठाया है कि आपात स्थितियों के लिए बनाया गया यह फंड इतनी बड़ी रकम को बैंक में निष्क्रिय क्यों रख रहा है और एजेंसियों से हुए रिफंड का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।उल्लेखनीय है कि मार्च 2020 में स्थापित पीएम केयर्स फंड एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट है, जो सरकार द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के दायरे से बाहर रखा गया है।