नई दिल्ली। देश में इस साल जून का महीना मौसम के लिहाज से असामान्य साबित हो रहा है। भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 126 वर्षों के रिकॉर्ड में यह दूसरा सबसे सूखा जून दर्ज किया जा रहा है। 21 जून तक देशभर में केवल 57.4 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जो सामान्य से 42.2 प्रतिशत कम है। मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से कई राज्यों में खेती-किसानी प्रभावित हो रही है, जबकि दूसरी ओर उत्तर और मध्य भारत के कई इलाके भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं।
126 साल में दूसरा सबसे सूखा जून
इस वर्ष मानसून की धीमी प्रगति ने मौसम वैज्ञानिकों और किसानों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। जून के अधिकांश दिनों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। इससे पहले वर्ष 2009 में जून महीने में सामान्य से 49 प्रतिशत कम वर्षा हुई थी, जिसे अब तक का सबसे सूखा जून माना जाता है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जुलाई में बारिश सामान्य नहीं रही तो इसका असर कृषि उत्पादन और जल संसाधनों पर भी पड़ सकता है।
दो सप्ताह की सुस्ती के बाद आगे बढ़ सकता है मानसून
मानसून की रफ्तार पिछले करीब दो सप्ताह से धीमी बनी हुई थी, लेकिन अब बंगाल की खाड़ी में बने मौसमीय सिस्टम के कारण इसके फिर सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में मानसून छत्तीसगढ़ सहित मध्य भारत के और हिस्सों में आगे बढ़ सकता है। इससे कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है और लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है।
मेघालय में रिकॉर्ड बारिश, राजस्थान में गिरे ओले
जहां देश के अधिकांश हिस्से बारिश की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं पूर्वोत्तर राज्यों में भारी वर्षा का दौर जारी है। मेघालय के मॉसिनराम क्षेत्र में 24 घंटे के भीतर 530 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो देश में सबसे अधिक रही। दूसरी ओर राजस्थान के श्रीगंगानगर में मौसम ने अचानक करवट ली और ओलावृष्टि देखने को मिली। अलग-अलग राज्यों में मौसम के इस विपरीत स्वरूप ने लोगों को हैरान कर दिया है।
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में लू का कहर जारी
बारिश की कमी के चलते मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में तापमान लगातार ऊंचा बना हुआ है। मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश के पांच जिलों और उत्तर प्रदेश के 38 जिलों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। दिन के साथ-साथ रात का तापमान भी सामान्य से अधिक बना हुआ है, जिससे लोगों को चौबीसों घंटे गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को धूप से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है।
खेती और खरीफ फसलों पर पड़ रहा असर
मानसून की देरी का सीधा असर खरीफ फसलों की बुआई पर दिखाई देने लगा है। बारिश की कमी के कारण कई इलाकों में किसान बुआई शुरू नहीं कर पाए हैं। विशेष रूप से दालों और कपास की खेती प्रभावित हुई है। हालांकि धान की बुआई में कुछ क्षेत्रों में बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन कुल कृषि गतिविधियों पर मौसम की अनिश्चितता का असर साफ नजर आ रहा है। यदि आने वाले हफ्तों में अच्छी बारिश नहीं होती है तो कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
अगले दो दिनों में कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार 23 और 24 जून को पूर्वोत्तर भारत, ओडिशा, तेलंगाना, कर्नाटक, कोंकण-गोवा और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। वहीं राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में प्री-मानसून गतिविधियों के चलते तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और विदर्भ क्षेत्र में हीटवेव का असर फिलहाल जारी रहने का अनुमान है।