नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार 17 मई 2026 से अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास की शुरुआत होने जा रही है। यह विशेष मास 15 जून 2026 तक रहेगा। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण और जनेऊ जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे, लेकिन पूजा-पाठ, दान-पुण्य और भगवान विष्णु की उपासना बेहद शुभ मानी जाएगी। इस बार अधिकमास ज्येष्ठ महीने में लग रहा है, जिसके कारण ज्येष्ठ मास 30 नहीं बल्कि करीब 60 दिनों का हो जाएगा।
क्यों खास होता है अधिकमास
अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह महीना भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। हिंदू पंचांग में सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच समय का अंतर संतुलित करने के लिए लगभग हर 32 महीने बाद एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है। विक्रम संवत 2083 में यह 13वां महीना होगा।
मांगलिक कार्यों पर रहेगा विराम
अधिकमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, भूमि पूजन, नए व्यवसाय की शुरुआत और अन्य शुभ संस्कारों को वर्जित माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस अवधि में ग्रह-नक्षत्र मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माने जाते।
पूजा-पाठ और दान का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास में भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और भगवान शिव की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। इस दौरान श्रीमद्भागवत, विष्णु सहस्त्रनाम, रामायण और गीता का पाठ करना शुभ माना गया है। इसके अलावा तीर्थ स्नान, सत्संग, मंत्र जाप, यज्ञ-अनुष्ठान और जरूरतमंदों को दान देने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
अधिकमास में क्या करें
अधिकमास में भगवान विष्णु की विशेष पूजा करें।
गायों को हरा चारा खिलाएं और गोशाला में दान दें।
जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र, जूते-चप्पल और छाते का दान करें।
महामृत्युंजय मंत्र और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
गंगा जल मिलाकर स्नान और शिव अभिषेक करना भी शुभ माना गया है।
अधिकमास की प्रमुख तिथियां
अधिक ज्येष्ठ मास प्रारंभ: 17 मई 2026
अधिक ज्येष्ठ मास समाप्त: 15 जून 2026
सामान्य ज्येष्ठ मास: 22 मई से 29 जून 2026 तक रहेगा।
क्यों जरूरी है अधिकमास
अगर अधिकमास की व्यवस्था न हो तो हिंदू पंचांग के त्योहार हर साल लगभग 10 दिन पीछे खिसकते जाएंगे। इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए पंचांग में यह अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है।