कोलकाता: कलकत्ता उच्च न्यायालय अगले मंगलवार को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने जा रहा है, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के स्कूलों में मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) कार्यक्रम के प्रबंधन की जिम्मेदारी इस्कॉन (ISKCON) को सौंपी गई है। यह मामला अब कानूनी और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है और अदालत इस पर विस्तार से विचार करेगी।
शाकाहारी मेनू पर उठे सवाल
याचिका में यह गंभीर सवाल उठाया गया है कि इस योजना के तहत केवल शाकाहारी (वेजिटेरियन) मेनू लागू करने से छात्रों को संतुलित और पोषणयुक्त आहार से वंचित किया जा सकता है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि बच्चों के विकास के लिए आवश्यक पोषण में गैर-शाकाहारी विकल्प भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इसे सीमित करना छात्रों के स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकता है।
स्वयं सहायता समूहों की आजीविका पर असर की आशंका
PIL में यह भी चिंता जताई गई है कि मिड-डे मील योजना की जिम्मेदारी इस्कॉन को दिए जाने से मौजूदा व्यवस्था से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता है। आरोप है कि इससे हजारों महिलाओं के रोजगार और आय के अवसर प्रभावित हो सकते हैं, जो वर्षों से इस कार्यक्रम से जुड़ी हुई हैं।
सरकार के फैसले पर बढ़ी नजरें
इस पूरे विवाद के बीच अब सभी की नजरें कलकत्ता हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत यह तय करेगी कि सरकार का यह निर्णय प्रशासनिक और सामाजिक दृष्टि से कितना उचित है और क्या इसमें किसी प्रकार की पुनर्विचार की आवश्यकता है।